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चौपाल: देशप्रेम

आज हमारे देश में बलात्कार, भीड़ द्वारा हत्या, लूट, ठगी आदि अपराधों की खबरों से अखबारों की सुर्खियां भरी रहती हैं। इन अपराधों के विरोध में आवाज उठाना भी देशप्रेम है।

Author July 10, 2019 4:47 AM

‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाना ही देशप्रेम नहीं है। अगर आप किसी गलत कार्य का विरोध करते हैं तो यह भी देशप्रेम है। बच्चे, महिलाएं और बूढ़े, जो फुटपाथ पर सोते हैं, उनके बारे में सोचते हैं तो यह भी देशप्रेम है। ट्रैफिक सिग्नल पर रुकते हैं तो यह भी देशप्रेम है। हम देश हैं, आप देश हैं। जब हम अच्छे होंगे तो हमारा देश भी अच्छा होगा। आज हमारे देश में बलात्कार, भीड़ द्वारा हत्या, लूट, ठगी आदि अपराधों की खबरों से अखबारों की सुर्खियां भरी रहती हैं। इन अपराधों के विरोध में आवाज उठाना भी देशप्रेम है।
’सैयद अहमद रजा, लखनऊ

उपभोक्ता संरक्षण
उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2019 को लोकसभा में पेश कर दिया गया है। सोलहवीं लोकसभा में भी इसे पेश किया गया था मगर चुनाव आ जाने के कारण यह स्वत: रद्द हो गया था। उम्मीद है कि इस बार इसे दोनों सदनों की मंजूरी मिल जाएगी। वैसे उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 का प्रावधान लागू है। फिर भी, समय में बदलाव के साथ इसमें संशोधनों की सख्त आवश्यकता थी। खासकर तब जब अब लोगों का खरीद-फरोख्त करने का तरीका बदल गया है।

इंटरनेट आ जाने से लोग अब आॅनलाइन खरीदारी करने लगे हैं। इसमें बहुत सारे लोग ठगी का शिकार भी बन रहे हैं। लिहाजा, इस विधेयक में इस पर विशेष तवज्जो दी गई है। साथ ही, सबसे बड़ा बदलाव इसमें यह है कि प्रसिद्ध कलाकार या खिलाड़ी जिन वस्तुओं के विज्ञापन करते हैं, उन चीजों को लोग आंख बंद करके खरीदते हैं। इस बार उन कलाकारों या खिलाड़ियों को भी दंडित करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी भ्रामक विज्ञापनों के जरिए आम लोगों को ठगा जा रहा है। आशा है, इस विधेयक के प्रभावी होते ही इन सब पर लगाम लग पाएगी।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

सेल्फी का जुनून
जर्नल आॅफ फेमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर ने हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि अक्तूबर 2011 से नवंबर 2017 के बीच दुनिया भर में सेल्फी लेते समय 259 लोग अपनी जान गंवा बैठे। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सेल्फी लेने में सबसे आगे महिलाएं रहती हैं। हमारे देश में सेल्फी लेते हुए सबसे ज्यादा लोगों की मौतें हुर्इं, जोविश्व में हुई कुल मौतों के आधे से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक सेल्फी शार्क से भी खतरनाक बन गई है। आज हमारे देश में जिस तरह सेल्फी के चक्कर में जान गंवाने वालों की तादाद बढ़ रही है, वह बहुत चिंताजनक है। लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए दूसरों से उम्मीद रखना उचित नहीं है। सेल्फी का जुनून इतना भी अपने सिर क्या चढ़ाना कि जान की भी परवाह न की जाए!

सेल्फी जान पर भारी न पड़े इसके लिए सरकार, प्रशासन और समाज को एकजुट होकर प्रयास करने चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह खतरनाक या जोखिम वााली जगहों पर सेल्फी लेने पर भारी जुर्माने का प्रावधान करे। समाज को चाहिए कि वह ऐसी सेल्फियों को नजरअंदाज करे जो जान पर खेल कर ली गई हों। साथ ही इसकी शिकायत पुलिस को करें ताकि सेल्फी के चक्कर में किसी के घर का चिराग न बुझे।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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