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चौपाल: बीमार सोच

प्रधानमंत्री ने शारीरिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए दिव्यांग शब्द प्रयोग करने का चलन शुरू किया था। लेकिन क्या आज भी हमारी सोच दिव्यांग लोगों के प्रति वैसी ही नहीं है?

Author Published on: April 25, 2019 1:04 AM
सपा नेता आजम खान फोटो सोर्स- ANI

सदियों से भारत ही नहीं, बल्कि लगभग समूचे संसार में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दूसरे स्थान पर माना जाता रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि महिलाओं को कभी पूरा सम्मान नहीं मिल पाया। एक तरफ तो हम संसद में महिलाओं को तैंतीस फीसद आरक्षण का प्रावधान कर उन्हें बराबरी का हक देना चाहते हैं ताकि वे अपनी आवाज संसद तक बेहिचक पहुंचा सकें। हम चाहते हैं कि महिलाओं के लिए बराबरी की शुरुआत संसद से ही की जाए। उधर समाजवादी पार्टी के एक नेता का जयाप्रदा के बारे में दिया बयान को सुनकर सिर शर्म से झुक जाता है। हमारे माननीय महिलाओं के प्रति इतना तंग नजरिया कैसे रख रखते हैं! महिलाओं के प्रति ऐसी सोच रखने वाले नेताओं की भरमार है जो समय-समय पर सुर्खियों में आते रहते हैं। सपा नेता के बयान से भी ज्यादा हैरानी उस जनसभा में खड़ी भीड़ पर है, जो इस तरह की बात पर भी तालियां बजाती है। यकीनन भीड़ में महिलाएं और बेटियां भी रही होगीं, पर किसी ने थोड़ा भी विरोध करना जरूरी नहीं समझा।

हम भले ही महिलाओं के लिए कानून बना लें, सरकार महिलाओं को प्रोत्साहित करने पर करोड़ों रुपए खर्च दे, बेटियों को बचाने के लिए अभियान शुरू कर दे पर इन सबका असर शहरों की दहलीज पार करते-करते दम तोड़ने लगता है। भेदभाव की बात करें तो आज भी विवाह से पहले वर पक्ष की जुबान पर एक ही सवाल होता है कि लड़की का रंग कैसा है? हैरानी की बात तो यह है कि ऐसी महिलाओं के प्रति हीन भावना रखने वालों में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे और समृद्ध लोग शामिल हैं। हम समाज की जिस धरोहर और सभ्यता की बात करते हैं, वह महिलाओं के मामले में धरी की धरी रह जाती है। प्रधानमंत्री ने शारीरिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए दिव्यांग शब्द प्रयोग करने का चलन शुरू किया था। लेकिन क्या आज भी हमारी सोच दिव्यांग लोगों के प्रति वैसी ही नहीं है? दिव्यांगों को आज भी केवल सरकारी सहायता का भरोसा है। हालांकि उनके लिए नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था रखी गई है लेकिन यह आरक्षण ऊंट के मुंह में जीरा भर साबित होता है। जरूरत है कि हम उनके हक और उन्हें पूरा सम्मान दें ताकि समाज में भेदभाव की यह बीमारी खत्म हो।
’रोहित यादव, महर्षि दयानंद विवि, रोहतक

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