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चौपाल: सिद्धांत के बिना व शरणार्थी बनाम घुसपैठिए

जिस तरह अपराध रोकने के लिए कानून बनाया गया है उसी तरह जल, जमीन, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी कानून बना कर प्लास्टिक निर्माण पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है।

झूठ को सच में बदल कर लोगों को गुमराह करना इनकी फितरत में है।

गांधीजी ने सात सामाजिक पाप गिनाए हैं। बिना सिद्धांत के राजनीति करना, नैतिकता के बिना वाणिज्य-व्यापार करना, मानवता के बिना विज्ञान का उपयोग करना, त्याग के बिना धर्म का पालन करना, चरित्र के बिना ज्ञान बघारना, अंत:करण की शुद्धि के बिना सुख की कल्पना करना और परिश्रम किए बिना भोजन व धनार्जन करना। इन सात बातों में से आज सबसे कम पालन किसी का हो रहा है तो वह है सिद्धांत के बिना राजनीति। पंचायत स्तर से लेकर संसद तक, अधिकारी से लेकर वैधानिक कार्यों तक। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, विकास, सुरक्षा, पर्यावरण आदि सभी क्षेत्रों में ज्यादातर नेता अपने स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं। झूठ को सच में बदल कर लोगों को गुमराह करना इनकी फितरत में है।

गांधीजी की 150वीं जयंती पर भारत को प्लास्टिक मुक्त करने की बातें तो खूब की गईं मगर एक भी प्लास्टिक कंपनी का नाम सामने नहीं आया जिसे बंद करने की बात कही गई हो। सिर्फ लोगों से कहा जा रहा है कि आप प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करें। हमारा मानना है कि प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों को बंद करा दीजिए। जिस तरह अपराध रोकने के लिए कानून बनाया गया है उसी तरह जल, जमीन, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी कानून बना कर प्लास्टिक निर्माण पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है। लेकिन यह काम करेगा कौन?

’जय तिवारी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

शरणार्थी बनाम घुसपैठिए

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) पर सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मंगलवार को कोलकाता के एक कार्यक्रम में कहा कि ‘देश से किसी शरणार्थी को जाने नहीं देंगे और घुसपैठिए रहने नहीं देंगे।’ दरअसल, शरणार्थी और घुसपैठिए में बहुत अंतर होता है। जो शरणार्थी भारत में बाहर से आए हैं उनसे देश की संप्रभुता और एकता को कोई खतरा नहीं होता, जबकि अवैध घुसपैठियों के कारण देश की शांति भंग होती है। इनके कारण अपराधों में वृद्धि हुई है, भूमि व संसाधनों पर अवैध कब्जे हुए हैं, जिसे रोका जाना चाहिए।

असम व पश्चिम बंगाल दोनों ही प्रदेशों में अवैध घुसपैठियों के कारण स्थायी निवासियों को बहुत-सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भूमि, नौकरी, व्यवसाय के साथ-साथ धार्मिक मामलों में भी घुसपैठियों के हस्तक्षेप के कारण आएदिन तनाव की स्थिति बनती है। कई बार तो नौबत मारपीट और दंगे तक पहुंच जाती है। स्थानीय चुनावों में भी इन अवैध घुसपैठियों की हिंसा फैलाने में संदिग्ध भूमिका थी। केंद्र सरकार को इसे देखते हुए एनआरसी का काम बहुत सावधानी से करने की आवश्यकता है।

’मंगलेश सोनी, मनावर, धार, मध्यप्रदेश

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