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चौपाल: सुधार का इंतजार व आतंक पर प्रहार

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से हमारे प्रधानमंत्री ने आतंकवाद पर न सिर्फ करारा प्रहार किया, बल्कि इसे प्रश्रय देने वालों की भी खिंचाई की।

प्रधानमंत्री को संवाद स्थापित करने की कला में महारत हासिल है।

सरकार को बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश के लिए खजाने का मुंह खोलना होगा। यह इसलिए जरूरी है ताकि इस निवेश का असर चालू वित्त वर्ष में ही महसूस हो और मंदी पर काबू पाया जा सके। यदि लगे तो राजकोषीय अनुशासन के मामले में कुछ छूट ली जा सकती है, लेकिन यह केवल बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश की शर्त पर हो। वैसे भी यह क्षेत्र शिद्दत से सुधार का इंतजार कर रहा है और इसमें अर्थव्यवस्था को व्यापक रूप से फायदा पहुंचाने की बहुत संभावनाएं हैं।
प्रधानमंत्री को संवाद स्थापित करने की कला में महारत हासिल है। अपने इस कौशल का उपयोग उन्हें सभी क्षेत्रों के उद्यमियों और निवेशकों का प्रत्येक मोर्चे पर हौसला बढ़ाने में करना होगा। उन्हें ‘आधुनिक भारत का सपना’ इस तबके के बीच लोकप्रिय बनाना होगा। इस साल पंद्रह अगस्त को उन्होंने लालकिले की प्राचीर से कहा था कि संपत्ति सृजित करने वालों का सम्मान करना चाहिए। प्रधानमंत्री को यह आश्वस्त करना होगा कि वास्तविक गलतियां और नुकसान स्वीकार्य होंगे और कानूनी ढंग से कमाई स्वागतयोग्य है।

’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर

आतंक पर प्रहार

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से हमारे प्रधानमंत्री ने आतंकवाद पर न सिर्फ करारा प्रहार किया, बल्कि इसे प्रश्रय देने वालों की भी खिंचाई की। 2014 के पहले कोई देश आतंकवाद पर हमारी बातें सुनने के लिए तैयार नहीं होता था, खासकर अमेरिका। लेकिन यह मौजूदा प्रधानमंत्री के नेतृत्व का ही कमाल है कि आज सिर्फ अमेरिका नहीं बल्कि दुनिया भर के ज्यादातर देश हमारी बातें सुन रहे हैं और भारत का समर्थन भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से जंग किए बिना ही उसकी हालत इतनी खराब कर दी है कि सिर्फ चीन को छोड़कर कोई अन्य बड़ा और प्रभावशाली देश उसकी सुनने को भी तैयार नहीं है, खासकर मुसलिम देश।

’राम मूरत ‘राही’, सूर्यदेव नगर, इंदौर

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