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चौपाल: हार की जीत

इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन ने चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराई थी लेकिन दक्षिण ध्रुव पर नहीं।

Author Published on: September 10, 2019 5:34 AM
जो भी अंतरिक्ष विज्ञान को समझते हैं वे जरूर भारत के इस प्रयास को प्रोत्साहन देंगे।

भारत बीते शनिवार की सुबह इतिहास रचने से दो कदम दूर रह गया। अगर सब कुछ ठीक रहता तो वह दुनिया का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के करीब उतरता। लेकिन आखिरी पल में चंद्रयान-2 का 47 दिन का सफर अधूरा रह गया। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन ने चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कराई थी लेकिन दक्षिण ध्रुव पर नहीं। चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर जाना बहुत जटिल था इसलिए भारत का मून मिशन चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया। क्या इसरो की यह हार है या इस हार में भी जीत छुपी है? आखिर चंद्रयान-2 की 47 दिनों की यात्रा अंतिम पलों में क्यों रह गई? क्या कोई तकनीकी खामी थी?

दरअसल, विक्रम लैंडर से भले ही निराशा मिली लेकिन यह मिशन नाकाम नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद की कक्षा में अपना काम कर रहा है और इसने विक्रम लैंडर को ढूंढ़ भी लिया है। इस ऑर्बिटर में कई उपकरण हैं जो अच्छे से काम कर रहे हैं। लिहाजा, इस हार में जीत भी है। ऑर्बिटर भारत ने पहले भी पहुंचाया था लेकिन चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर से चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर ज्यादा आधुनिक और वैज्ञानिक उपकरणों से लैस है।

इस विफलता से इसरो पीछे नहीं जाएगा और प्रधानमंत्री ने भी यही बात दोहराई है। अमेरिका, रूस और चीन को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता मिली है। सॉफ्ट लैंडिंग का मतलब होता है कि आप सैटेलाइट को किसी लैंडर से सुरक्षित उतारें और वह अपना काम सुचारु रूप से कर सके। चंद्रयान-2 को भी इसी तरह चंद्रमा की सतह पर उतारना था लेकिन आखिरी क्षणों में यह सभव नहीं हो पाया। दुनिया भर के पचास फीसद से भी कम मिशन हैं जो सॉफ्ट लैंडिंग में कामयाब रहे हैं। जो भी अंतरिक्ष विज्ञान को समझते हैं वे जरूर भारत के इस प्रयास को प्रोत्साहन देंगे।

’विपिन डागर, सीसीएस यूनिवर्सिटी, मेरठ

विसर्जन के समय

हर साल की तरह इस वर्ष भी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का समय आ गया है। देश के कोने-कोने में बड़ी मात्रा में श्रद्धालु तालाबों, नदियों व अन्य जलाशयों में विसर्जन के लिए जाते हैं। विसर्जन के दौरान कई बार लापरवाही बरतने, सेल्फी लेने या अति उत्साह में गहरे पानी में चले जाने से श्रद्धालुओं की डूबने से मृत्यु हो जाती है। जिन परिवारों की आंखों के तारों ऐसे हादसों के शिकार होते हैं वहां उत्साह व आनंद की जगह मातम पसर जाता है। इन पर्वों को आनंद के साथ मनाएं, अति उत्साह और श्रद्धा के जोश में होश न खोएं। इसलिए श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सावधानी व सजगता से विसर्जन करना चाहिए।

’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

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