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चौपाल: कैसे मिले रोजगार

शिक्षित लोग अपनी योग्यता और डिग्री के अनुरूप रोजगार के तलाश में होते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से शिक्षित व्यक्ति की डिग्री का ज्ञान और पाठ्यक्रम रोजगार हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

Author Published on: October 14, 2019 5:22 AM
देश में नौकरी की संख्या कम होती जा रही है।

देश में आज बेरोजगारी बड़ी समस्या के रूप में मौजूद है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआइई) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर सात फीसद है और पिछले दो वर्षों से बेरोजगारी दर में इजाफा तेजी से हुआ हैं। बेरोजगारी दूर करने में सरकारें असफल साबित हुई हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें खाली पड़े पदों को भरने में उदासीन रवैया अख्तियार कर रही हैं। दूसरी ओर निजी क्षेत्र में नौकरियों के अवसर होने के बावजूद उद्यमियों को अपेक्षित कौशल और जरूरत के अनुसार उम्मीदवार नहीं मिल पाने की शिकायत है। अशिक्षित लोगों के मुकाबले शिक्षित लोगों में बेरोजगारी की दर ज्यादा हैं, क्योंकि शिक्षित लोग अपनी योग्यता और डिग्री के अनुरूप रोजगार के तलाश में होते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से शिक्षित व्यक्ति की डिग्री का ज्ञान और पाठ्यक्रम रोजगार हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए देश में रोजगारोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को लागू करना जरूरी है। इसके लिए शिक्षा पाठ्यक्रम और व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है।
’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली (नागपुर)

बराबरी का दर्जा
महिलाओं को सिर्फ आलेखों में और तकरीरों में बराबरी का दर्जा दिया जाता है। कहा जाता है महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिला कर देश दुनिया के विकास में लगी हैं। पूरब हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण, महिलाओं को बराबरी का हक कहीं नहीं मिला है। चाहे शिक्षण संस्थान हों या वेतन में समानता की बात हो, आज भी पूरे विश्व में स्त्रियों को अपने अधिकारों के लिए पुरुष प्रधान समाज से संघर्ष करना पड़ रहा है। कहते हैं कि चार दशक के बाद ईरान की महिलाओं को स्टेडियम में जाकर फुटबाल मैच देखने की इजाजत मिली। एक और रूढ़ि से जकड़े देश सउदी अरब ने भी कुछ उदारता बरती है। सउदी अरब में पहले महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत मिली, फिर उन्हें अकेले विदेश यात्रा पर जाने की छूट दी गई। उसके बाद अब सैन्य सेवा में भी महिलाओं की भर्ती को हरी झंडी दे दी गई। देर से ही सही, ईरान और सऊदी अरब की देखा-देखी अन्य देश भी महिलाओं को समानता का अधिकार देने को बाध्य होंगे।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी (जमशेदपुर)

 

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