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चौपाल: नोटबंदी का सच, तालिबान का आतंक व पाक में हिंदू

मानवाधिकार संगठनों को सिंध, बलूचिस्तान, और पाक अधिकृत कश्मीर में लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है।

सांकेतिक तस्वीर।

नोटबंदी किए जाने को लेकर सरकार ने जो वादे किए थे, वे बिल्कुल ही निरर्थक साबित हुए। कुछ दिन पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने 2017-18 और 2018-19 में पकड़े गए नकली नोटों का जो आंकड़ा सार्वजनिक किया है, वह चौंकाने वाला है। पता चला है कि दो साल में जाली नोटों की संख्या दस गुना बढ़ गई। दस, बीस और सौ रुपए के नोटों के साथ-साथ दो सौ रुपए के नकली नोटों की संख्या एक सौ साठ गुना, पांच सौ रुपए के नोटों की संख्या एक सौ इक्कीस गुना और दो हजार के नकली नोटों में बाईस फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है। नोटबंदी के समय दलील दी गई थी कि इससे नकली नोटों का बाजार में आना बंद हो जाएगा, आतंकवाद पर अंकुश लगेगा, जमाखोरी असंभव होगी। लेकिन आज तो नकली नोट पहले के मुकाबले और ज्यादा चलन में हैं। आज जो मंदी है, अर्थशास्त्री उसका भी एक बड़ा कारण नोटबंदी बता रहे हैं। इसके अलावा, नोटबंदी के बाद क्या आतंकवाद की घटनाएं नहीं हुईं, क्या जाली नोटों का बाजार में चलन रुक गया। इसी तरह जीएसटी को मंदी का बड़ा कारण बताया जा रहा है, जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है।

’मोहम्मद आसिफ, जामिया नगर, दिल्ली

तालिबान का आतंक

दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है। मगर इसकी भी एक सीमा है। मान लीजिए, अमेरिका के साथ रूस की दुश्मनी है। इसका मतलब ये तो नहीं होना चाहिए कि जो तालिबान अफगानिस्तान में रोजाना आत्मघाती हमले कर सैकड़ों लोगों को मार रहा है, उसके साथ अगर अमेरिका शांति वार्ता से पीछे हट जाता है तो रूस क्यों उन आतंकवादियों को वार्ता के लिए अपने घर पर आमंत्रित करता है? सांप को कितना भी दूध पिलाओ, वह मौका मिलेगा तो डसेगा ही। दो दिन पहले ही राष्ट्रपति अशरफ गनी के चुनावी रैली में आत्मघाती हमला किया गया, जिसमे अड़तालीस लोग मारे गए। केवल अगस्त में ही हर दिन औसतन चौहत्तर अफगान नागरिक तालिबान के हमलों में मारे गए। हर हमले में तालिबान का नाम आ रहा है। ऐसे में इन लोगों से बात करने का कोई तुक ही नहीं है।

’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर

पाक में हिंदू

हाल के दिनों में पाकिस्तान में आए दिन अल्पसंख्यकों के साथ बदसलूकी करने के मामले सामने आए हैं। अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक हिंदू लड़की की हत्या कर दी गई। यह लड़की मेडिकल की छात्रा थी। उसका दोष सिर्फ यही था कि वह अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से थी। पाकिस्तान में भी लोग खुलेतौर पर इसका विरोध कर रहे हैं। सत्ता में बैठे पाकिस्तानी हुक्मरान कश्मीर में अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढहाने के सवाल तो देश-दुनिया में उठा रहे हैं, उन्हें अपने देश की ये घटनाएं नजर क्यों नहीं आती। मानवाधिकार संगठनों को सिंध, बलूचिस्तान, और पाक अधिकृत कश्मीर में लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। दहशतगर्दी का आलम तो पाकिस्तान में इस कदर फैला है कि लोग वहां हमेशा खौफ में रहते हैं।

’अविनाश कुमार झा, समस्तीपुर

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