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चौपाल: जोखिम में जननी

आखिर क्या गलती है स्त्री कि जो उनके साथ इतना जघन्य अपराध हो रहा है। आज स्त्रियां कहीं भी खुद को सुरक्षित महसूस नही कर पा रही हैं। ऐसे कितने मामले आ चुके हैं, जिसमें घर का ही कोई सदस्य या फिर कोई करीबी ही उनके खिलाफ यौन हिंसा करता है।

Author Published on: December 9, 2019 2:37 AM
यौन हिंसा के 80 फीसदी मामलों में अश्लील साइटें, तस्वीरें जिम्मेदार। प्रतीकात्मक तस्वीर।

समाज में माना जाता है कि सृष्टि की रचना स्त्रियों द्वारा ही होती है। एक स्त्री ही पुरुष की जननी होती है और वही पुरुष जब बड़ा हो जाता है तो उसी स्त्री के शरीर को नोचता, जलाता है। लगातार समाज में घट रहे अमानवीय कृत्यों ने स्त्रियों के जीवन को नरक बना दिया है। हम किस समाज का निर्माण कर रहे हैं? जिस समाज में सृष्टि की जननी ही सुरक्षित नहीं है, वह समाज कैसा होगा? दशहरा में स्त्रियों को देवी मान कर पूजा की जाती है और फिर उन्हीं स्त्रियों पर अत्याचार की झड़ी लगा दी जाती है। उसी स्त्री को कभी दहेज के लिए जलाया जाता है तो कभी उसका बलात्कार किया जाता है तो कभी जन्म से पहले ही उसे भ्रूण में ही मार दिया जाता है। महिलाओं को कब तक इस पुरुष के समाज में घुट-घुट कर जीना पड़ेगा? कब तक दहेज के लिए वह जलती रहेगी? कब तक उनका बलात्कार होता रहेगा?

आखिर क्या गलती है स्त्री कि जो उनके साथ इतना जघन्य अपराध हो रहा है। आज स्त्रियां कहीं भी खुद को सुरक्षित महसूस नही कर पा रही हैं। ऐसे कितने मामले आ चुके हैं, जिसमें घर का ही कोई सदस्य या फिर कोई करीबी ही उनके खिलाफ यौन हिंसा करता है। स्त्रियां घर में हों या बाहर, कहीं भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही है। वे कौन लोग हैं हमारे समाज में जो दरिंदा बन कर समाज को कलंकित कर रहे हैं। अब हर इंसान को सोचना होगा कि हम अपनी बेटियों को सुरक्षित और दूसरे की बेटियों को चील की नजर से क्यों देखते हैं? अब वक्त आ गया है कि सरकार कोई बहुत बड़ा और ठोस कदम उठाए, जिससे स्त्रियों पर हो रहे अत्याचार से मुक्ति मिल सके और समाज को चाहिए कि अपने हर बच्चे को नैतिकता का पाठ पढ़ाए, ताकि वह बलात्कार जिसे घिनौने करतूतों के खिलाफ खड़ा हो सके।
’अनु मिश्रा, सिवान

ऊर्जा का खेल
अधिकतर विद्यालयों में हर वर्ष वार्षिकोत्सव के दौरान खेलकूद स्पर्धा का आयोजन होता है। स्कूलों और कॉलेजों की एक दिवसीय खेलकूद स्पर्धा के कारण खिलाड़ियों प्रदर्शन जड़वत दिखाई देता है तो आखिर उस स्पर्धा में कोई खिलाड़ी चैम्पियन कैसे बन जाए? दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, तिहरी कूद, चक्का फेंक, भाला फेंक, गोला फेंक, डिस्क थ्रो आदि खेलों को खेला जाता है। जो खिलाड़ी उस समय जीत जाता है, वह विजेता बन जाता है, लेकिन उसका वास्तविक खेल आधार जिला, संभाग, राज्य स्तर पर पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाता। खेलों में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों के लिए खेल प्रशिक्षकों द्वारा खेलों के साथ स्टेमिना या ऊर्जा बढ़ाने जैसे उपाय किया जाना आवश्यक है। खिलाड़ियों में भी कुछ कर गुजरने जज्बा होगा तभी वे खेलों में आगे बढ़ सकते हैं। इन एथलीटों की तैयार पौध को स्टेमिना, खेल तकनीक अगर प्राप्त होगा तो वे आगे चल कर ओलिंपिक या एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर अपने गांव, शहर, देश का नाम रोशन करेंगे और साथ ही अन्य देशों की तरह खिलाड़ियों की संख्या में इजाफा भी होगा। पदक संख्या बढ़ने से देश का नाम रोशन होगा।
’संजय वर्मा ‘दृष्टि’, मनावर, धार

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