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चौपाल: पराली का धुआं, सरकारी लापरवाही व जानलेवा गड्ढे

हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के खेतों में पराली जलाई जा रही है और उसका धुआं दिल्ली की ओर आ रहा है।

Author Published on: October 17, 2019 2:19 AM
हालांकि खेतों में पराली जलाना गैरकानूनी है, फिर भी किसान इस पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

इन दिनों दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों के लिए फिर से चेतावनी आई है कि पंजाब और हरियाणा से हर साल की तरह पराली का धुआं आना शुरू हो गया है। इन राज्यों में किसानों ने धान की फसल के अवशेष यानी पराली जलानी शुरू कर दी है। इससे राजधानी के दो सौ किलोमीटर तक दायरे में लोगों के लिए सांस तक लेना दूभर हो जाएगा। दिल्ली सरकार ने तो हवा को शुद्ध रखने के लिए अगले महीने सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने के लिए ऑड-ईवन व्यवस्था फिर से लागू करने का एलान कर दिया है।

हालांकि खेतों में पराली जलाना गैरकानूनी है, फिर भी किसान इस पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। हालांकि किसानों के सामने भी मजबूरी है, उनके सामने पराली को नष्ट करने का कोई विकल्प या सुविधा नहीं है। अगर नहीं जलाएंगे तो अगली फसल कैसे लगाएंगे, यह बड़ी समस्या है। इसके लिए समाधान तो सरकारों को ही निकालना होगा। पराली जलाने से खेतों की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है।

’घनश्याम गुप्ता, बलिया

सरकारी लापरवाही

आखिर जिस चीज का डर था वही हुआ। हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के खेतों में पराली जलाई जा रही है और उसका धुआं दिल्ली की ओर आ रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक में मंडी गोबिंदगढ़, जलंधर, लुधियाना जैसे शहरों की हवा सबसे प्रदूषित आई है। पर अब सरकार के हाथ-पैर मारने और इस प्रदूषण को काबू करने का कोई मतलब नहीं, क्योंकि जब सरकार को सख्त होना चाहिए था, तब उसने सख्ती नहीं दिखाई। इसका नतीजा हम सब के सामने है। परंतु अब सरकार की प्रदूषित वायु को शुद्ध करने की गाड़ी आकर दीवाली के पटाखों पर रुकेगी। लेकिन क्या सिर्फ पटाखों को रोकने या उस पर समय का प्रतिबंध लगाने से वायु को साफ किया जा सकता है? अब सरकार यही कदम उठाएगी और ये भी भूल जाएगी कि तीन सौ पैंसठ दिन की समस्या को सिर्फ एक दिन के प्रतिबंध से काबू नहीं किया जा सकता।

’जानवी बिट्ठल, जलंधर

जानलेवा गड्ढे

मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री और लोक निर्माण मंत्री ने राजधानी भोपाल की सड़कों का निरीक्षण किया और पाया कि बरसात के कारण सड़कों की हालत खस्ता हो गई है। उन्होंने पंद्रह-बीस दिन में सड़कों की मरम्मत की बात भी कही। बारिश के कारण केवल भोपाल की नहीं, पूरे प्रदेश की सड़कें गड्ढों से युक्त गई हैं। हाल में होशंगाबाद में सड़क के गड्ढों ने पांच होनहार हॉकी खिलाड़ियों की जान ले ली। इंदौर के मुख्य मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे हादसों का कारण बन रहे हैं। लेकिन कोई देखने-सुनने वाला नहीं है। प्रशासन को चाहिए तत्काल सड़कों की मरम्मत करवाई जाए, ताकि जनता हादसों का शिकार न हो।

’महेश नेनावा, इंदौर

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