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चौपाल: सुरक्षा का तकाजा

इतिहास गवाह है कि सख्त कानूनों से सभी लोग सुधरें यह जरूरी नहीं।

Author Published on: September 11, 2019 3:08 AM
सांकेतिक तस्वीर।

भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में लगभग डेढ़ लाख लोग मारे जाते हैं। बेवजह की इन मौतों पर लगाम लगाने के लिए ही नए मोटर वाहन अधिनियम में यातायात नियम तोड़ने पर लगाए वाले जुर्माने में कई गुना की बढ़ोतरी की गई है। देश के कुछ शहरों में किए गए हजारों रुपए के बड़े-बड़े चालान इसका उदाहरण हैं। मीडिया भी इन बड़े चालानों की खबरें उनकी रकम के साथ सुर्खियों में प्रकाशित-प्रसारित कर रहा है और लोग मजाक भी उड़ा रहे हैं। पर ध्यान देने वाली बात है कि ये सब वे लोग हैं जिन्होंने एक साथ कई नियम तोड़े हैं। मजाक के इतर हमें कानून की सख्ती को गंभीरता से समझाना और ईमानदारी से उसका पालन करना होगा।

दिल्ली में एक शख्स ने मोटा चालान होने के बाद अपनी मोटर साइकिल में आग लगा दी। मतलब, हम कानून तोड़ने का शौक तो रखते हैं लेकिन सजा भुगतने को तैयार नहीं हैं! हालांकि ऐसी हरकतें एक और गुनाह को जन्म देती हैं। हो सकता है नए कानून में भी कुछ सुधार की जरूरत पड़े लेकिन वे बातें कानून तोड़ कर या कानून का मजाक उड़ा कर नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता से करनी होंगी।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है कि भारी जुर्माना लगाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था सड़क पर अनुशासन लाना और ऐसे हादसों को रोकना जिनसे लोगों की जान चली जाए। फिलहाल तो जुर्माने का डर काम कर रहा है क्योंकि प्रदूषण प्रमाण पत्र और बीमा कराने वालों, हेलमेट खरीदने वालों की संख्या अचानक कई गुना बढ़ गई है और प्रेशर हॉर्न जैसे उत्पादों की बिक्री घट गई है। मगर जुर्माने की राशि बढ़ने से पुलिस में भी भ्रष्टाचार बढ़ सकता है, उस पर भी लगाम लगाना जरूरी है।

इतिहास गवाह है कि सख्त कानूनों से सभी लोग सुधरें यह जरूरी नहीं। समाज का एक तबका हमेशा सुधारों के खिलाफ ही काम करता है। हत्या, बलात्कार, डकैती जैसे जघन्य अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान है मगर उसके बाद भी ऐसे अपराध न रुके, न कम हुए। नागरिकों को भी जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा और सरकार को कोशिश करनी चाहिए कि चालान कम हों और कानून का पालन ज्यादा हो।

इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए और भी बहुत से काम करने होंगे जैसे सड़कों की हालत और डिजाइन सुधारना, सार्वजनिक यातायात को सर्वसुलभ और सुगम बनाना, ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ियों की फिटनेस प्रकिया में भ्रष्टाचार खत्म करना, वाहनों को और अधिक सुरक्षित बनाना, घटिया कलपुर्जों पर लगाम लगाना, सड़कों पर से अतिक्रमण हटाना आदि।

’बृजेश माथुर, बृज विहार, गाजियाबाद

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