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चौपाल: शिक्षक की भूमिका

आए दिन शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों और विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें सुनने को मिलती हैं। इसे देखकर हमारी संस्कृति की अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रश्नचिह्न लगता नजर आने लगा है।

Author Published on: September 5, 2019 3:07 AM
शिक्षक उस माली के समान है जो एक बगीचे को अलग-अलग रूप-रंग के फूलों से सजाता है।

गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है जिसके कई स्वर्णिम उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं। शिक्षक उस माली के समान है जो एक बगीचे को अलग-अलग रूप-रंग के फूलों से सजाता है। जो छात्रों को कांटों पर भी हंसते हुए चलने के लिए हिम्मत देता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखें तो गुरु-शिष्य की परंपरा कहीं न कहीं कलंकित हो रही है। आज तमाम ऐसे शिक्षक भी हैं जो अपने ज्ञान की बोली लगाने लगे हैं। आए दिन शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों और विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें सुनने को मिलती हैं। इसे देखकर हमारी संस्कृति की अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रश्नचिह्न लगता नजर आने लगा है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों का ही दायित्व है कि वे इस महान परंपरा को बेहतर ढंग से समझें और एक अच्छे समाज के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें।

यह सर्वविदित है कि हमारे जीवन को संवारने में शिक्षक एक बड़ी और महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सफलता प्राप्ति के लिए वे हमारी कई तरह से मदद करते हैं। मसलन, वे हमारे ज्ञान-कौशल के स्तर और आत्मविश्वास आदि को बढ़ाते हैं, हमारे जीवन को सही आकार में ढालते हैं। इसलिए अपने निष्ठावान शिक्षकों के प्रति हमारी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है। हमें एक आज्ञाकारी विद्यार्थी के रूप में अपने शिक्षकों का तहेदिल से अभिनंदन करने की जरूरत है। शिक्षक दिवस हम सभी के लिए ऐसे शिक्षकों को धन्यवाद देने का अवसर है जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के हमें काबिल बनाने की कोशिश की है।
’अमन सिंह, प्रेमनगर, बरेली, उत्तर प्रदेश

खयाली पुलाव
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान जिस तरह आसमान सिर पर उठाए हुए है, उससे तो यही साबित होता है कि यह अनुच्छेद जाने-अनजाने उसके हितों की पूर्ति अधिक कर रहा था। यह सही है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी सेना की कठपुतली अधिक हैं, लेकिन उन्हें इतनी समझ तो होनी चाहिए कि वे भारत को धमका कर कुछ हासिल नहीं कर सकते। भारत को झुकाने-डराने का खयाली पुलाव पकाने से पहले उन्हें पाकिस्तान की छवि और दयनीय आर्थिक दशा पर भी गौर करना चाहिए। चूंकि अपने सैन्य अफसरों के मुकाबले इमरान खान भारत से भली भांति परिचित हैं, इसलिए वे इस हकीकत से भी दो-चार होंगे कि आज का भारत हर मामले में पाकिस्तान से बीस है। वे और उनके फौजी जनरल यह समझें तो बेहतर होगा कि पाकिस्तान का हित भारत से संबंध सुधारने और उससे मिलकर चलने में है।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

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