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चौपाल: मानसून की वापसी

मौसम विभाग ने दस अक्तूबर के बाद मानसून के लौटने की उम्मीद जताई है। इस दौरान अगर पश्चिमी राजस्थान में लगातार पांच दिन तक वर्षा नहीं होती तो मानसून लौटने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

Author Published on: October 8, 2019 5:50 AM
बिहार में बाढ़ और बारिश से हालात खराब फोटो सोर्स- पीटीआई

आधिकारिक रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून को अब तक भारत से लौट जाना चाहिए था, लेकिन देश के विभिन्न भागों में अभी भी वर्षा का दौर जारी है। इस वर्ष जून को छोड़ दें तो अन्य मानसूनी महीनों जुलाई, अगस्त और सितंबर में सामान्य से क्रमश: 104.6, 115.4 और 152.3 फीसद अधिक वर्षा हुई है। सितंबर में हुई वर्षा सन 1917 के बाद सर्वाधिक है जब सामान्य से 165 फीसद अधिक वर्षा हुई थी, जो ला-निना से प्रभावित वर्ष था। इस वर्ष मानसून का आगमन भी लगभग एक हफ्ते देरी से हुआ था। इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस, बंगलुरु के वैज्ञानिक जे श्रीनिवासन का मानना है कि आइओडी, जिसे इंडियन ला-निना भी कहते हैं, के बने रहने की वजह से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। मौसम विभाग ने दस अक्तूबर के बाद मानसून के लौटने की उम्मीद जताई है। इस दौरान अगर पश्चिमी राजस्थान में लगातार पांच दिन तक वर्षा नहीं होती तो मानसून लौटने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। पिछले साल भी मानसून की वापसी अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू हुई थी।
’शिवशंकर यादव, इलाहाबाद विवि

हरित पटाखे
केंद्र ने दीपावली पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए पर्यावरण अनुकूल हरित पटाखे की शुरुआत कर सराहनीय कदम उठाया है। विज्ञान, तकनीक, स्वास्थ्य एवं भूविज्ञान मंत्री ने हरित पटाखों से बढ़ते ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का दावा भी किया है। य़ह कदम कितना सार्थक होगा, य़ह आने वाले समय में ही पता चलेगा। शहरों में जानलेवा प्रदूषित वातावरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई बार चिंता जाहिर कर चुका है। कहा जा रहा है कि हरित पटाखे इस प्रदूषित वातावरण को तीस फीसद तक कम कर सकतें हैं, क्योंकि इनमें प्रदूषण फैलाने वाले तत्व बोरियम नाइट्रेट की मात्रा अत्यंत कम होती है। अगर सरकार के इस कदम को जनता का विश्वास और सहयोग मिलता है तो निस्संदेह देश में प्रदूषण पर कुछ सीमा तक रोक लगाई जा सकती है।
’बिजेंद्र कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय

कलयुग का रावण जलाएं
त्रेतायुग में तो एक रावण था, लेकिन कलयुग में तो हर जगह रावण है। त्रेतायुग के रावण से ज्यादा तो आज के रावण पापी नजर आते हैं। कलयुग के रावण के दस से भी ज्यादा सिर विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीति की व्याधियों के रूप में मौजूद हैं, जिनमें स्वार्थ, बेईमानी, हेराफेरी, अनैतिकता, भ्रष्टाचार, शोषण, नशा, धर्म-जाति पर हिंसा जैसी बुराइयां फैली हैं। दशहरे के दिन लोग रावण, कुंभकर्ण, मेघनाथ और अन्य राक्षसों के पुतलों को आग लगाकर खुशी मनाते हैं। पर इन पुतलों के साथ सभी को अपनी बुराइयों को भी जलाना चाहिए। भविष्य में कभी भी गलत न करन की शपथ लेनी चाहिए। आज समाज में बहुत से ऐसे लोग है जो अपनी किसी शक्ति चाहे वह धन की हो, शरीर की हो या पद की, उसके अहंकार में आकर दूसरों लोगों की मजबूरियों का फायदा उठा कर उन्हें परेशान करते हैं। अहंकारी लोगों को कोई भी अच्छा नहीं कहता है। इसलिए दशहरे पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम कभी भी किसी बात का अहंकार न करें।
’राजेश कुमार चौहान, जलंधर

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