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चौपाल: मंदी की मार, संकट में जाधव व भ्रष्टाचार का नतीजा

उत्पादित वस्तुओं की मांग में कमी के कारण कंपनियों का कारोबार ठप हो गया है और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है।

Author Published on: September 4, 2019 1:49 AM
देश के सार्वजनिक बैंक घाटे में हैं।

देश की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है। अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्र संकट का सामना कर रहे हैं। आर्थिक सुस्ती के चलते जीडीपी वृद्धि दर पांच फीसद रह गई है। विनिर्माण क्षेत्र की दर आधा फीसद रह गई है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर दो फीसद रह गई है। देश के सार्वजनिक बैंक घाटे में हैं। उत्पादित वस्तुओं की मांग में कमी के कारण कंपनियों का कारोबार ठप हो गया है और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है। हालात देख कर लगता है कि सरकार इस अप्रत्याशित मंदी से अनभिज्ञ थी, इसलिए इन मुश्किलों से निपटने की को तैयारी नहीं थी। अब आनन-फानन में बड़े फैसले किए जा रहे हैं। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह मंदी अचानक नहीं आई, बल्कि सरकार द्वारा पिछले वर्षों में किए गए गलत आर्थिक फैसलों के कारण ऐसा हुआ है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदम आम व्यापारियों के लिए मारक साबित हुए। सरकार को चाहिए कि पिछली गलतियों से सबक लेकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए योग्य अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों की सलाह मानते हुए कदम उटाने चाहिए।

’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली (नागपुर)

संकट में जाधव

अंतरराष्ट्रीय अदालत के दबाव में पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच देने को बाध्य हुआ। तीन साल की प्रतीक्षा के बाद भारत के उपउच्चायुक्त कुलभूषण से मिले। लेकिन जो बातें सामने आई हैं वे चिंताजनक ही हैं। कुलभूषण की बातों से लग रहा है वह पाकिस्तानी दबाव में है और वही बोल रहा है जो पाकिस्तानी अधिकारी चाहते हैं। हालांकि यह तो होना ही था। इस बातचीत की रिकॉर्डिंग भी की गई। ऐसे में उसे मालूम है कि कुछ देर में भारतीय दूत तो उसके पास से चले जाएंगे। उसके बाद उन्हें तो पाकिस्तानियों की कैद में ही रहना है। कुलभूषण मामले में आइसीजे ने पिछले जुलाई में जो फैसला दिया था उसे पूरा न्याय तो नहीं कहा जा सकता। क्या पाकिस्तान की सैन्य या सिविल अदालतों से जाधव को न्याय मिल सकेगा? जबकि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सजा देने वाला जज यह कह चुका है कि उसने दबाव में आकर सजा सुनाई थी। ऐसे में कुलभूषण का क्या होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। निकट भविष्य में तो कुलभूषण के पाकिस्तान के चुंगल से छूटने के आसार दिखाई नहीं देते।

’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी (जमशेदपुर)

भ्रष्टाचार का नतीजा

झारखंड की कोनार नदी पर सिंचाई परियोजना शुरू हुई थी, जिसे पूरा होने में बयालीस साल का समय लग गए। फिर कोढ़ मे खाज यह है कि झारखंड के मुख्यमंत्री द्वारा परियोजना का उद्घाटन करने के महज चौदह घंटे के अंदर ही यह परियोजना ढह गई। इससे पैंतीस गांव की फसलें पानी में डूब कर तहस-नहस हो गई। इस घटना से जाहिर होता है कि देश में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कि क्या दशा है? भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी का दीमक राष्ट्र को पूरी तरह से जर्जर कर रहा है। जो अधिकारी भी इस परियोजना में शामिल रहे हैं, वो कोई पाकिस्तान या चीन से आए हुए लोग नहीं हैं, यही के हैं। इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसी देश का नमक खाने वाले लोग विकास निर्माण में इस प्रकार की सेंध लगाएंगे तो देश की क्या हालत होनी है! सोचा जा सकता है।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद (उज्जैन)

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