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चौपाल: इंसानियत के शत्रु

अपराधी किसी भी धर्म का हो, अब उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। ऐसे अपराध में दोषियों को फांसी की सजा हुई, लेकिन उनका फंदे तक नहीं पहुंच पाना भी हमारी व्यवस्था की कमजोरी को बताता है। बस, यह स्मरण रहे कि आपाधापी में कोई बेकसूर कानून का शिकार न हो जाए।

Author Published on: June 12, 2019 1:32 AM
7 साल की बच्ची को पहले किया किडनैप, फिर किया रेप फोटो सोर्स- जनसत्ता

मासूम कन्याओं के साथ ज्यादती और तत्पश्चात उनकी बर्बरता पूर्वक हत्या कर देना पाशविकता की पराकाष्ठा है। समझ नहीं आ रहा है कि जिस देश के लोगों की रग-रग में करुणा, मानवता के संस्कार बहते थे, वे इतने पत्थर दिल कैसे हो गए! कड़े कानून व सजा के बाद भी ऐसे अपराधों का बढ़ना विचारणीय है। अपराधी किसी भी धर्म का हो, अब उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। ऐसे अपराध में दोषियों को फांसी की सजा हुई, लेकिन उनका फंदे तक नहीं पहुंच पाना भी हमारी व्यवस्था की कमजोरी को बताता है। बस, यह स्मरण रहे कि आपाधापी में कोई बेकसूर कानून का शिकार न हो जाए।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

प्रदूषण के विरुद्ध
पर्यावरण संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी सबसे अहम है। इसके जरिए ही अपेक्षित सुधार हो सकता है। लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन और संबंधित विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाना होगा। आम लोगों को स्वयं भी अपने आसपास के पेड़-पौधों की रक्षा करने के साथ-साथ ऐसे संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए जिनसे पर्यावरण का कम से कम नुकसान पहुंचे। प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन को सख्ती बरतनी होगी। लोग जगह-जगह गंदगी के ढेर लगा देते हैं जिससे निकलने वाली गैसें पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदेह हैं। वाहन मालिक अक्सर प्रदूषण मानकों का पालन नहीं करते। प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वे प्रदूषण फैलाने व नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे। हर जिले में पौधारापण शत-प्रतिशत होना चाहिए। जहां भी खाली भूमि हो, वहां अधिक से अधिक पौधे लगाए जाने चाहिए। जितने ज्यादा पौधे होंगे, पर्यावरण उतना ही स्वच्छ होगा। पौधारोपण के साथ ही पौधों की देखभाल के लिए भी सार्थक पहल होनी चाहिए।
’अमरेंद्र मणि त्रिपाठी, सिंदुरियां, महराजगंज

बिन पानी
आज से करीब 450 साल पहले जब भारत में नदियां स्वच्छ पानी से लबालब भरी रहती थीं, कुंओं और तालाबों में भी बारहोमास अथाह जल रहता था। उस समय कवि रहीम ने शायद आज की परिस्थिति को देखकर ही लोगों को जल के प्रति जागरूक करते हुए लिखा था ‘रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।’ पर अब जब पानी के लिए हर तरफ हाहाकार मचा है, तब यह दोहा प्रासंगिक लग रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते पूरी दुनिया संकट के दौर में है। हमारे देश का ही करीब 40 फीसद भाग सूखे और पानी की किल्लत से जूझ रहा है। करीब आठ से दस करोड़ लोग पनी के किल्लत से परेशान हो रहे हैं। देश की राजधानी में तो भूजल की स्थिति बेहद चौंकाने वाली है। यहां भूगर्भ मे मौजूद करीब 75 फीसद पानी पीने लायक नहीं रहा।
गंगा को स्वच्छ करने में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी केवल कुछ जगह ही उसका पानी पीने योग्य पाया गया,बाकी तो नहाने के काबिल भी नहीं रहा। रसातल में पहुंच चुके भूजल स्तर से एक और समस्या बढ़ते तापमान की होने लगी है। इस वर्ष देश के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री तक पंहुच गया, यहां तक कि हिल स्टेशनों पर भी असहनीय गर्मी हो गई। समय रहते हमें अब भी सचेत होकर पानी का अपव्यय रोकना होगा, साथ ही नदियों-तालाबों और अन्य जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना होगा।
’संजय डागा, देवी अहिल्या कॉलोनी, हातोद

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