ताज़ा खबर
 

चौपाल: नागरिकता पर सवाल और ‘फिट इंडिया’ अभियान

क्या यह असल में देश के नागरिक पर सरासर हमला नहीं है।

Author Published on: September 4, 2019 2:13 AM
हाल में प्रधानमंत्री ने खेल दिवस के अवसर पर फिट इंडिया अभियान का उदघाटन करके इसकी शुरुआत की।

देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर ( एनआरसी ) पर फिर सवाल उठ रहे हैं। इतने बड़े और जरूरी काम में इतनी बड़ी भूल चूक कैसे हो सकती है कि ज्यादातर लोगों के नाम ही गायब हैं? यह एक चिंता का विषय है। इसको तो सीधा पैंसे और समय की बर्बादी कहेंगे। जो संस्था एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई उस तक ने आंकड़ों में फेरबदल की शिकायत है। आॅल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) भी इसके विरोध में बोल रहा है। भाजपा और कांग्रेस भी इससे अछूते नहीं रहे और एनआरसी पर सवाल उठा रहे हैं।

क्या यह असल में देश के नागरिक पर सरासर हमला नहीं है। सवाल उठना वाजिब है लेकिन इतनी महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया में ऐसा होगा, ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था। लेकिन अब लग रहा है कि एनआरसी में पूरी तरह से लापरवाही बरती गई है। इस मसले को लेकर आवाज उठानी होगी ताकि एनआरसी में फिर सुधार किए जाएं और असल नागरिक को उसका अधिकार दिया जाए।

’आशीष, रामलाल आनंद कालेज, दिल्ली

‘फिट इंडिया’ अभियान

दुनिया में स्वास्थ्य से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। शरीर अगर स्वस्थ हो तो सब कुछ अच्छा लगता है। इसलिए स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन कहा गया है। इसी कड़ी में सरकार अब आम लोगों को स्वस्थ बनाने के लिए अभियान चला रही है। पहले स्वच्छता, फिर योग और अब ‘फिट इंडिया अभियान’। हाल में प्रधानमंत्री ने खेल दिवस के अवसर पर फिट इंडिया अभियान का उदघाटन करके इसकी शुरुआत की। इस अभियान का असली मकसद प्रत्येक नागरिक को दुरुस्त रखना है। इसके लिए सरकार बड़े स्तर पर अभियान चलाएगी, शहर हो या गांव हर जगह लोगों को फिट रहने के तरीके बताए जाएंगे। इस अभियान में देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को भी शामिल किया गया है जिसके तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय को पंद्रह दिवसीय फिटनेस प्लान तैयार करना होगा और बाकायदा उसे अपने पोर्टल, वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

भारत की जीडीपी को देखें तो स्वास्थ्य पर देश में सिर्फ इसका एक फीसदी ही खर्च होता है जो पिछले एक दशक में सबसे कम है। वहीं दूसरी ओर आम जीवन में लोगों का अधिकतर खर्च दवाइयों में हो रहा है। सरकार एक तरफ स्वच्छ भारत के तहत वातावरण शुद्ध करने की ओर बढ़ रही है तो योग और फिट इंडिया के जरिए लोगों को भी सेहत के लिए सचेत करने की कोशिश की जा रही है। स्वास्थ्य पर खर्च के मामले में श्रीलंका, मालदीव और भूटान जैसे देश भी हमसे काफी आगे हैं। निस्संदेह यह अभियान सरकार की अच्छी पहल साबित हो सकता है।
’देवपाल सिंह राणा, हापुड़।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 चौपाल: मंदी की मार, संकट में जाधव व भ्रष्टाचार का नतीजा
2 चौपाल: जनसंख्या नियंत्रण
3 चौपाल: बाढ़ के पीछे व समझ से परे