चौपाल: जरूरी है जन-भागीदारी व चीन की चाल

चीन ने अपनी चाल चल दी है और उसमें पाकिस्तान फंसता भी नजर आ रहा है।

सांकेतिक तस्वीर।

प्रधानमंत्री ने एक बार कहा था कि सरकार के प्रयासों में जब जन-भागीदारी जुड़ती है, तब उसकी शक्ति बढ़ जाती है। देश के बहुत से उन समृद्ध लोगों ने गैस सबसिडी प्रधानमंत्री के कहने पर छोड़ दी जिन्हें इसकी जरूरत नहीं। शायद इसी का नतीजा है कि सरकार ने गरीब महिलाओं को धुआं मुक्त रसोई उपलब्ध कराने के लिए उज्जवला योजना के तहत रसोई गैस मुहैया करवाई। इसी तरह दूरदराज गांवों तक बिजली पहुंचाई, देश को साफ-सुथरा रखने के लिए स्वच्छ भारत अभियान में देश अपनी भागीदारी निभा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि देश के विकास में सरकार के प्रयासों के साथ ही नागरिकों का भी योगदान जरूरी होता है, चाहे वे सरकारी खजाने में कर जमा करवाने के रूप में हो या फिर वे अपना हर वह काम ईमानदारी से करें जो देशहित में हो।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लोकतंत्र की मर्यादा का ख्याल रखते हुए हमारे देश के नागरिक सरकार की हर नीति को स्वीकार करते हैं। सरकार बनाने के लिए लाइनों में खड़े होकर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपनी भागीदारी निभाते है, लेकिन अफसोस तो इस बात का है कि कुछ राजनेता और सत्ताधारी आम लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

चीन की चाल

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर बात युद्ध तक पहुंच चुकी है। दोनों देशों से युद्ध की बयानबाजी अपने चरम पर है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप जानते हैं कि अगर दोनों देशों के बीच छोटा-सा युद्ध भी हो गया तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा होगा। इसलिए ट्रंप ह्यूस्टन में कश्मीर मुद्दे पर कोई न कोई हल निकालना चाहते हैं और इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाना भी चाहते हैं। इन सब बातों के बीच एक देश है जो इसका फायदा उठाने की कोशिश भी कर रहा है और भारत और पाकिस्तान के बीच जंग भी कराना चाहता है और वह देश है चीन।

चीन ने अपनी चाल चल दी है और उसमें पाकिस्तान फंसता भी नजर आ रहा है। एक बात और, चीन पीछे से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को जंग के लिए भारत के खिलाफ उकसा रहा है और इस बात का भी दावा किया जा रहा है कि चीन पाकिस्तान से यह कह रहा है कि अगर कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका मध्यस्थता करेगा तो चीन भी शामिल होगा। नहीं तो अमेरिका भारत का पक्ष मजबूती से सुनेगा और पाकिस्तान को नजरअंदाज कर सकता है।

’ब्रजेश सैनी, फतेहपुर, उप्र

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