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चौपाल: निजता में सेंध

फर्क इतना ही है कि कोई व्यक्ति, समूह या पीढ़ी इसको ‘गॉसिप’ कह कर जायज बताते रहे हैं तो आज के डिजिटल समय में लोग उसको ‘वायरल हो गया’ कह कर सही बताते हैं।

Author May 18, 2019 3:07 AM
आईपीएल के दौरान अचानक सुर्खियों में आई लड़की।

पिछले दिनों आईपीएल में बंगलुरु की टीम के मैच के दौरान एक लड़की पर कैमरा कुछ सेकेंड्स को ठहरा। जल्द ही उस अनजान युवती की कैमरे द्वारा ली गर्ईं उन कुछ सेकेंड्स की तस्वीरें सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ होने लगीं। इसके बाद ‘स्टॉकर्स’ ने कुछ ही समय में उस लड़की की अन्य तस्वीरें व सोशल मीडिया अकॉउंट्स तक खोज लिए गए। रातों-रात मिली इस ‘प्रसिद्धि’ के बारे में लड़की का कहना है कि उसकी सारी जानकारियां सार्वजनिक हो गर्इं जबकि वह ऐसा कुछ नहीं चाहती थी।

अब इस बात पर कुछ सेकेंड्स ठहर कर सोचें हम सब। क्या बिना किसी की इच्छा के उसकी तस्वीरों या सोशल मीडिया अकॉउंट को इस तरह से वायरल करना सही है? इसे वायरल का नाम देना भी कितना सही है? हम एक लड़की का पीछा करते हैं; उसकी सोशल प्रोफाइल्स को सार्वजनिक कर देते हैं, जबकि वह ऐसा कुछ नहीं चाहती; और एक तरह के डिजिटल शोषण को हम वायरल होने का नाम दे रहे हैं? उस लड़की को उसकी खूबसूरती के लिए तारीफें मिलने के साथ ही कई तरह के नफरती संदेशों का भी सामना करना पड़ रहा है। उनके लिए जिम्मेदारी कौन लेगा?

यह बात सिर्फ इतनी नहीं है। इसके और भी कई पहलू व स्तर हैं। दूसरों के निजी मसलों के बारे में बातें करना हम सभी को पसंद ही है। फर्क इतना ही है कि कोई व्यक्ति, समूह या पीढ़ी इसको ‘गॉसिप’ कह कर जायज बताते रहे हैं तो आज के डिजिटल समय में लोग उसको ‘वायरल हो गया’ कह कर सही बताते हैं। बड़े परिदृश्य में देखें तो समाज के विभिन्न स्तरों पर हम एक समाज के तौर पर किसी की निजता को समझने व उसका सम्मान करने से अभी भी कोसों दूर हैं।
’शिवम कुमार श्रीवास्तव, इलाहाबाद

खतरे का सबब
जलवायु परिवर्तन इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर का सबसे ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण न्यूजीलैंड और कई अन्य छोटे देशों पर खतरा मंडराने लगा है। इस साल सितंबर में जलवायु शिखर सम्मेलन होगा। इसे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के आखिरी मौके के रूप में देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कुछ दिन पहले संवाददाताओं से कहा था कि हम लोग यह लड़ाई हार रहे हैं। जलवायु परिवर्तन हमारी कोशिशों से ज्यादा तेजी से हो रहा है। अगर हमने इस समस्या का शीघ्र कोई समाधान नहीं निकाला तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरे का सबब बन जाएगा।
’संजू कुमार, चौबारा, हनुमानगढ़, राजस्थान

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