ताज़ा खबर
 

चौपाल: इंदौर की नजीर व गलत क्या

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के प्राथमिक स्कूल सिहाड़ा में बच्चों से टॉयलेट साफ कराने का जो वीडियो वायरल हुआ था।

Author Published on: October 5, 2019 3:46 AM
जब स्वच्छ भारत अभियान चलाया गया तो प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों को सफाई के प्रति जागरूकता का संदेश दिया था तो स्कूलों में साफ-सफाई कराने में क्या बुराई है!

इस साल गांधी जयंती से देश में एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायक होगा। स्वच्छता के मामले में लगातार तीन बार पहले स्थान पर रहने वाले इंदौर शहर ने तो प्लास्टिक और पॉलीथिन के खिलाफ पिछले तीन वर्षों से मोर्चा खोल रखा है। इंदौर के कई बाजार आज प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर चुके हैं। इंदौर नगर निगम ने अनूठी पहल करते हुए एक बर्तन बैंक भी शुरू कर दिया है। इसमें पांच-पांच सौ नग थाली, कटोरी, गिलास, जग और प्लेटें जमा करके लोगों को आयोजनों के लिए निशुल्क देना शुरू किया है।
इससे तीन माह की अल्प अवधि में ही लगभग दस टन एकल इस्तेमाल प्लास्टिक का उपयोग रुका जो एक मिसाल है। यदि इंदौर का अनुसरण कर देश के अन्य शहरों में भी इस तरह के बर्तन बैंक शुरू किए जाए तो टनों प्लास्टिक और पॉलीथिन का उपयोग रोका जा सकता है।

’संजय डागा, हातोद, इंदौर

गलत क्या

पिछले दिनों एक खबर के नकारात्मक पक्ष पर तो ध्यान दिया गया लेकिन उसकी सकारात्मकता सुर्खियां नहीं बन पाई। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के प्राथमिक स्कूल सिहाड़ा में बच्चों से टॉयलेट साफ कराने का जो वीडियो वायरल हुआ था उस पर विवाद खड़ा हो गया। लेकिन इस विवाद का सबसे सकारात्मक पक्ष यह रहा कि कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल ने कहां कि सारे बच्चे टॉयलेट तो क्या, स्कूल भी साफ करें तो इसमें गलत क्या है! उन्होंने जापान की मिसाल देते हुए कहा कि वहां बच्चे स्कूल के हर काम में लगे रहते हैं तो उन्हें लगता है कि यह स्कूल मेरा है, इसे मैं गंदा नहीं कर सकता। आज स्कूलों में बच्चों से साफ-सफाई कराने पर फोटो व समाचार छप जाते हैं और अनावश्यक विवाद पैदा कर दिया जाता है।

हमारे देश की गुरुकुल परंपरा में तो राजा-रंक सभी अपनी शिक्षा-दीक्षा के समय आश्रम की साफ-सफाई करना, पानी लाना, जंगल से लकड़ी लाना या अन्य काम करते थे क्योंकि यह शिक्षा भी जीवनोपयोगी है। जब स्वच्छ भारत अभियान चलाया गया तो प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों को सफाई के प्रति जागरूकता का संदेश दिया था तो स्कूलों में साफ-सफाई कराने में क्या बुराई है! इसे सकारात्मक चश्मे से देखना जरूरी है।
’हेमा हरि उपाध्याय अक्षत, खाचरोद, उज्जैन

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 चौपाल: आपदा को न्योता व संतुलन जरूरी
2 चौपाल: बच्चों की खातिर व अपना गिरेबां
3 चौपाल: नापाक मंसूबे व अमन का रास्ता