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चौपाल: भरोसे का बल

निस्संदेह इसका आकलन करने में समय लगेगा कि हाल ही में आए प्रचंड फनी तूफान ने कहां कितना नुकसान पहुंचाया, लेकिन यह जानना सुखद है कि लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

Author May 17, 2019 1:18 AM
चक्रवाती तूफान फानी (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

राष्ट्रीय आपदा कार्रवाई बल यानी एनडीआरएफ आपदा की स्थिति में भरोसे का बल ही नहीं, देश की एक ताकत भी है। बीते कुछ वर्षों में इस बल ने तूफान, बाढ़ के साथ-साथ बड़ी दुर्घटनाओं में राहत और बचाव के जो कार्य किए हैं, उनसे एक मिसाल कायम हुई है। इस बल ने अब तक साढ़े चार लाख से अधिक लोगों को बचाने का ही काम नहीं किया है, बल्कि राहत और बचाव संबंधी तंत्र को भी सुदृढ़ किया है। जो लोग यह रोना रोते रहते हैं कि देश तरक्की नहीं कर रहा और कहीं भी हालात ठीक नहीं हैं उन्हें एनडीआरएफ सरीखी संस्थाओं के कामकाज को देखना चाहिए। निस्संदेह इसका आकलन करने में समय लगेगा कि हाल ही में आए प्रचंड फनी तूफान ने कहां कितना नुकसान पहुंचाया, लेकिन यह जानना सुखद है कि लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। चूंकि ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम में अप्रत्याशित तब्दीली रह-रह कर होते रहने के आसार हैं, इसलिए देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

मर्यादा के विरुद्ध
इन दिनों अनेक विपक्षी दल केंद्र सरकार पर संविधान के हनन का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इन दलों के नेता खुद विभिन्न राज्यों में संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों को अपने प्रदेश में कार्रवाई करने से रोक चुके हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए गए भाजपा अध्यक्ष के हेलीकॉप्टर को उतरने की अनुमति नहीं दी और उन्हें रैलियां करने से रोकने की कोशिश की। ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री तक मानने को तैयार नहीं और उन्हें देश निकाला देने की बात करती हैं। कभी प्रधानमंत्री को गालियां दी जाती हैं; कभी उनकी खाल उतरवाने की बात की जाती है; कभी उन्हें गुंडा बोला जा रहा है।

क्या ऐसे व्यवहार से संविधान की गरिमा अक्षुण्ण रह पाएगी? ये बड़ी गंभीर बातें हैं जो भारत के संघीय स्वरूप के लिए बिल्कुल अशुभ हैं। सत्ता की लड़ाई का वर्तमान स्वरूप देश की अखंडता के लिए बेहद खतरनाक रूप धारण करता जा रहा है। चुनाव आयोग को केंद्र सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ तालमेल करके भविष्य के लिए चुनाव प्रचार के नए नियम निश्चित करने होंगे ताकि इसकी मर्यादाएं सुरक्षित रहें और चुनाव प्रचार के समय अराजकता न फैले।
’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, नई दिल्ली

साइबर सेंधमारी
‘फेसबुक’ ने स्वीकार किया है कि उसके ‘व्हाट्सएप’ ऐप में एक सुरक्षा चूक की वजह से लोगों के मोबाइल फोन में जासूसी सॉफ्टवेयर घुस गया है। ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर एक इजराइली कंपनी ने विकसित किया है। इस जासूसी सॉफ्टवेयर को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए लोगों के फोन में डाला गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि कोई व्हाट्सएप प्रयोगकर्ता कॉल का जवाब नहीं देता है तब भी उसके फोन में यह सॉफ्टवेयर डाला जा सकता है।
कनाडा के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस जासूसी सॉफ्टवेयर से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं को निशाना बनाया गया है। फेसबुक ने ग्राहकों से कहा है कि वे गूगल प्ले-स्टोर पर जाकर व्हाट्सएप के नए वर्जन को अपडेट कर लें। दुनियाभर में डेढ़ सौ करोड़ से अधिक लोग व्हाट्सएप इस्तेमाल करते हैं। इस प्रकरण से साफ है कि सोशल मीडिया की दुनिया में साइबर हमलों का खतरा अभी कम नहीं हुआ है।
’प्रियंबदा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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