ताज़ा खबर
 

चौपाल: एक ही लक्ष्य

उम्मीद है कि इस कसौटी पर प्रधानमंत्री सौ फीसद खरे उतरेंगे। जिस तरह जनता ने अपने वोट से उन्हें आशीर्वाद दिया है, उनका भी एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि देश को उपलब्धियों की नई बुलंदियों पर ले जाएं।

Author May 25, 2019 4:40 AM
शानदार जनादेश के बाद कार्यक्रम में लोगों का अभिवादन स्वीकारते हुए पीएम मोदी। (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त जीत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मैं आगे भी सर्वमत से काम करता रहूंगा; बदनीयत या बदले की भावना कतई नहीं होगी।’ उनके संबोधन का एक-एक शब्द दिल को छू जाने वाला है। न दंभ, न अभिमान, न किसी से कोई शिकवा-शिकायत। चुनाव के बाद का नया सवेरा अविस्मरणीय काम की राह देख रहा है। उम्मीद है कि इस कसौटी पर प्रधानमंत्री सौ फीसद खरे उतरेंगे। जिस तरह जनता ने अपने वोट से उन्हें आशीर्वाद दिया है, उनका भी एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि देश को उपलब्धियों की नई बुलंदियों पर ले जाएं।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

सेवा का समय
चुनाव के बाद बाद माननीयों को अपना असली कार्य ‘जनसेवा’ शुरू कर देना चाहिए। जिस तत्परता, उत्साह, सजगता और परिश्रम से सभी ने जी-जान लगा कर चुनाव प्रचार किया, वह वाकई आश्चर्यचकित करता है। उम्मीद ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि चाहे पक्ष हो या विपक्ष, यही जज्बा और जुनून देशसेवा-जनसेवा करने और अपनी घोषणाओं को पूरा करने में भी दिखाएंगे। नेताओं के लिए सत्ता प्राप्ति का ध्येय महज एक पड़ाव है; देशसेवा सर्वोपरि है जो अपनी कथनी-करनी को एक करके दिखाने से ही संभव है।

इस चुनाव में पैसा पानी की तरह बहाया गया जिससे पता चलता है कि कोई भी दल गरीब नहीं है। वे योजनाओं को अपने बलबूते लागू और पूरा करने में सक्षम हैं, तो फिर चाहे सरकार किसी की भी बने, सबको मिल कर देश के उद्धार में लग जाना चाहिए। हर चुनाव में केवल काम बोलता है। अब बड़े-बड़े नामों और उनकी लुभावनी घोषणाओं की हकीकत जनता जान चुकी है, लिहाजा सभी दल अविलंब देशसेवा-जनसेवा में अपने आपको समर्पित करें।
’मोहित सोनी, कुक्षी, धार, मध्यप्रदेश
नतीजों का सबक

अस्सी के दशक में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण जाति व क्षेत्र आधारित कई राजनीतिक पार्टियों उदय हुआ जिन्होंने राजनीति में जाति व क्षेत्र को सत्ता प्राप्ति के एक मुख्य हथियार की तरह प्रयोग किया। इससे किसी का भी सामाजिक और आर्थिक विकास तो हुआ नहीं उलटे एक-दूसरे के प्रति जातीय व क्षेत्रीय विद्वेष की भावना प्रबल होती गई। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जातिवाद व क्षेत्रवाद की राजनीति पर एक हद तक अंकुश लगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जाति एक बड़ा घटक रही लेकिन राष्ट्रभक्ति, देश की सुरक्षा और विकास के मुद्दों ने जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद की राजनीति को काफी पीछे छोड़ दिया है।

इसका श्रेय मौजूदा प्रधानमंत्री को ही जाता है जिन्होंने जातिवादी राजनीतिक परिवेश को विकासवादी और राष्ट्रवादी परिवेश में बदल दिया। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे हैं। ये उन सभी नेताओं को सबक हैं जिन्होंने केवल वंशवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद की राजनीति की है। वे अपनी सियासत चमकने के लिए सेना के पराक्रम तक पर प्रश्नचिह्न लगाने, दुश्मन देश की तारीफ करने से भी नहीं चूके और गाली देना उनके लिए आम बात हो गई। मौजूदा लोकसभा चुनाव के परिणामों ने साबित कर दिया कि देश की सुरक्षा, सम्मान और विकास सर्वोपरि हैं और प्रत्येक नागरिक इसे मन से स्वीकार करता है।
’सुनील कुमार सिंह, मोदीपुरम, मेरठ

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App