ताज़ा खबर
 

चौपाल: नेपाल की आपत्ति व लोकतंत्र पर प्रहार

भारत सरकार ने नेपाली प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि नया नक्शा सही तरीके से भारत की संप्रभुता और अखंडता को दर्शाता है।

Author Published on: November 13, 2019 2:43 AM
भारत सरकार ने नेपाली प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि नया नक्शा सही तरीके से भारत की संप्रभुता और अखंडता को दर्शाता है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा हाल में भारत का नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया गया है। इस नए नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में दिखाया गया है। लेकिन भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने इस पर विवाद खड़ा कर दिया है। इस नए नक्शे में कालापानी क्षेत्र को भारतीय भूभाग में दिखाए जाने पर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि नेपाल अपनी संप्रभुता, अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। कालापानी क्षेत्र चार सौ वर्ग किलोमीटर में विस्तारित है जो नेपाल के धार्चुला जिले का हिस्सा है। जबकि भारत इस क्षेत्र को उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा मानता है। वर्तमान समय में भारतीय सेना की तैनाती भी इस क्षेत्र में है।

सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, इसलिए चीनी सेना की घुसपैठ को रोकने के लिए क्षेत्र विशेष में भारतीय सेना की तैनाती आवश्यकता से कहीं अधिक विवशता है। असल में देखा जाए तो इस क्षेत्र को खतरा नेपाल की तुलना में चीन से ज्यादा है, क्योंकि चीन ऐसे विवादित सीमावर्ती इलाकों पर अपनी नजरें गड़ाए बैठा है और नए मौकों की तलाश में है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय तक इस क्षेत्र में नेपाली सैनिकों की उपस्थिति रहती थी। लेकिन बाद में भारत सरकार ने नेपाल से बातचीत के माध्यम से इस क्षेत्र विशेष में भारतीय सेना की तैनाती के लिए एक समझौता किया था। उसी के बाद से आज तक लगातार क्षेत्र विशेष में भारतीय सेना तैनात है। कालापानी क्षेत्र को लेकर पूर्व में भी कोई समझौता नहीं हुआ है। इसलिए क्षेत्र पर वास्तविकता में किस देश का अधिकार होगा, कहना मुश्किल है। वर्ष 1816 में सुगौली संधि में भी यह बताया गया था कि काली नदी भारत और नेपाल के बीच पश्चिमी सीमा का निर्धारण करेगी। लेकिन ब्रिटेन की गलती के कारण आज तक इसका निर्धारण नहीं किया जा सका।

भारत सरकार ने नेपाली प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि नया नक्शा सही तरीके से भारत की संप्रभुता और अखंडता को दर्शाता है। यदि भारत और नेपाल के बीच सीमा का विवाद है तो उसके निराकरण के लिए लगातार बातचीत चल रही है और जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा। नेपाल को यह भी समझने की आवश्यकता है कि किसी दूसरे देश के आर्थिक हितों के लिए यदि भारत के नए नक्शे को विवाद का विषय बनाया जाता है, तो यह भारत-नेपाल संबंधों के लिए अच्छा नहीं होगा, क्योंकि इससे पहले ही चीन और पाकिस्तान ने भी भारत के नए नक्शे पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में नेपाल द्वारा इस मुद्दे पर खुल कर बोलने से निश्चित तौर पर यह स्पष्ट होता है कि नेपाल किसी देश के दबाव में ऐसी टिप्पणी कर रहा है, जो किसी भी दृष्टि से उचित प्रतीत नहीं होता है।

चीन और पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ने के कारण नेपाल लगातार भारत आतंकियों का गढ़ बनता जा रहा है। जहां एक तरफ जम्मू-कश्मीर के रास्ते आतंकियों की घुसपैठ कम हुई है, वहीं दूसरी तरफ नेपाल के रास्ते भारत में भारत विरोधी तत्वों का प्रवेश बढ़ा है। ऐसे में नेपाल को भी यह समझने की आवश्यकता है कि यदि नेपाल-भारत विरोधी तत्वों को शरण देता है और भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती उत्पन्न करने तत्वों की सहायता करता है।

’कुलिंदर सिंह यादव, दिल्ली

लोकतंत्र पर प्रहार

यह लोकतंत्र की शक्ति ही है कि जो किसी भी दल को शीर्ष पर भी पहुंचा देती है और जमीन भी दिखा देती है। लेकिन आजकल की अवसरवादी राजनीति में अब साप लगने लगा है कि लोकतंत्र की यह ताकत कहीं विलुप्त होती जा रही है। बात चाहे हरियाणा की हो, या महाराष्ट्र की, राजनेता सत्ता हासिल करने के लिए और अपनी सत्ता बनाने के लिए किसी का भी साथ छोड़ सकते हैं और किसी को भी दोस्त बना सकते हैं। ऐसे में लोकतंत्र फजीहत की राह पर आ चुका है। लोग किस गठबंधन सरकार को मत डालते हैं और आखिर में किसी और की ही सरकार बन जाती है। फिर ऐसे में क्या महत्त्व रह जाता है लोगों के मतों का!

सबसे अधिक हैरानी तो इस बात की होती है कि जो दल दूसरे दल को देखना तक पंसद नही करता, वह कैसे इतनी जल्दी रंग बदल कर उसके साथ समर्थन तक उतर आता है। आखिर फिर जीत तो अवसरवादी राजनीति व राजनेताओं की इच्छा की ही होती है, परंतु इससे कहीं न कहीं लोकतंत्र विलुप्ति की राह पर चला गया है।

’जाह्नवी बिट्ठल, जलंधर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 चौपाल: सद्भाव का पोषण व प्रकृति पर्व
2 चौपाल: जाति की जकड़ व नापाक मंसूबे
3 चौपाल: आगे की सुध लें
जस्‍ट नाउ
X