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चौपाल: न्याय का तकाजा

हमें आज के बारे में सोच कर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बेहतर समाज का निर्माण करना होगा जिसकी पहचान एक सभ्य समाज के रूप हो।

Author Published on: December 7, 2019 3:18 AM
निर्भया गैंगरेप मामला, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स -इंडियन एक्सप्रेस)

सन 2013 में निर्भया प्रकरण से हाल तक महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में केवल एक अंतर आया है और वह है अपराध की प्रकृति या किरदार का। निर्भया मामले के बाद जिस तरह के न्याय की आशा की गई थी वैसा देखने को नहीं मिला, क्योंकि अभी तक निर्भया के मुजरिमों को सजा नहीं मिली। अगर हम ऐसे संगीन मामलों में दंड देने की नजीर पेश नहीं करेंगे तो अपराधियों का हौसला बढ़ता रहेगा। कानून बनाने तक ही हमारी जिम्मेदारी सीमित नहीं है, इससे आगे हमारी जवाबदेही इसे लागू कराने की भी है। हमें आज के बारे में सोच कर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बेहतर समाज का निर्माण करना होगा जिसकी पहचान एक सभ्य समाज के रूप हो।
’गौरव मिश्रा, इलाहाबाद

प्याज के आंसू
देश के कई राज्यों में लोग प्याज के आंसू रो रहे हैं। प्याज कई शहरों में 75 से 100 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है। इस पर सियासत भी खूब की जा रही है। कभी किसी नेता के बयान को ‘ट्रोल’ किया जा रहा है, तो कभी सांसद प्याज की माला लेकर संसद में आ जाते हैं। इस बीच तुर्की से 4000 टन प्याज आयात करने की खबर आ रही है, जो कि मध्य जनवरी तक भारत पहुंच जाएगा। इसके अलावा भी भारी मात्रा में मिस्र से प्याज का आयात किया जाएगा।
गौरतलब है कि हमारे देश के ही महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात व बिहार समेत कई राज्यों में प्याज की भरपूर पैदावार होती है। सरकारी गोदामों में रखे प्याज के हर साल सड़ जाने या खराब हो जाने की खबरें भी आती हैं। इसके बावजूद हमें विदेशों से प्याज आयात करना पड़ रहा है! सरकार को चाहिए कि सरकारी गोदामों में सामान के रख-रखाव की स्थिति में सुधार लाए और कालाबाजारी पर रोक लगाने के प्रयास करे। यदि अपने देश के किसानों से खरीद कर सही तरह से प्याज का रखरखाव किया जाता तो आज हमें उसका आयात करने की जरूरत नहीं पड़ती।
’उपासना, दिल्ली विश्वविद्यालय

कानून के मुताबिक
सांसद और विधायक सिर्फ जनप्रतिनिधि नहीं होते। वे नियम बनाने और देश चलाने वाले भी होते हैं। इसलिए उन्हें हर वक्तव्य काफी सोच-समझ कर देना चाहिए। अब राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने सोमवार को संसद में कह दिया कि जिन्होंने हैदराबाद की पशु चिकित्सक के साथ बलात्कार कर उसे जला दिया, उनकी ‘मॉब लिंचिंग’ कर दी जानी चाहिए। ठीक है, जयाजी काफी क्रोधित थीं इसलिए ऐसा कह दिया होगा। मगर उन्हें आम आदमी जैसा बयान देने से बचना चाहिए था। क्या उन्हें नहीं मालूम कि यह देश कानून और संविधान के प्रावधानों से चलता है। ऐसे में अजमल कसाब को भी तुरंत मार देना चाहिए था। मगर ऐसा नहीं किया गया।

हमारा समाज सऊदी अरब नहीं है। हां, कानूनी प्रक्रिया में देर क्यों होती है, इस देरी को कैसे खत्म किया जाए, इस पर सांसदों को मंथन करना चाहिए। वैसे केवल कानून कड़ा कर देने और मोमबत्ती वाले प्रदर्शनों से पुरुषों की हैवानियत नहीं रुकने वाली। सदियों से यह होता आया है। शिक्षा और संपन्नता के विस्तार से भी ये नहीं रुकने वाला है। अगर ऐसा होता तो फिर यूरोप और अमेरिका में बलात्कार कब का खत्म हो गया होता।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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