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चौपाल: प्रकृति से खिलवाड़

हमारे पास आज इतना भी वक्त नहीं है कि हम कुछ पल निकाल कर यह सोचें कि जिस दुनिया में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा ही नहीं होगी, वहां मेट्रो, मॉल और बुलेट ट्रेन के होने का क्या मतलब रह जाएगा।

Author Published on: October 8, 2019 5:33 AM
मुंबई मेट्रो के लिए आरे कॉलोनी में काट दिए गए करीब 2500 पेड़। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है जहां जिंदगी का पर्याय मौत हो गया है। धरती के एक भू-भाग में बाढ़ का कहर है, तो दूसरे में सूखे की मार। धरती की इस दुर्गति की जवाबदेही और जिम्मेदारी किसकी है, यह एक यक्ष प्रश्न है। हम दुनिया को अपनी आंखों के सामने बद से बदतर होते देख रहे हैं और हमारा दुर्भाग्य यह है कि हम इस पर मौन हैं। हम विकास की सीढ़ियां चढ़ते हुए जंगलों को काट कर रहे हैं और खुद की पीठ थपथपा रहे हैं। हमारे पास आज इतना भी वक्त नहीं है कि हम कुछ पल निकाल कर यह सोचें कि जिस दुनिया में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा ही नहीं होगी, वहां मेट्रो, मॉल और बुलेट ट्रेन के होने का क्या मतलब रह जाएगा। पानी और हवा जैसी बुनियादी चीजों के अभाव में हमारा विकास धरा का धरा रह जाएगा।

आज आप अपने आसपास नजर डालें तो यह पाएंगे कि सबसे अधिक बीमारी से कोई जूझ रहा है तो वह देश का युवा है। युवा अवसाद का शिकार है, अस्थमा, उच्च रक्तचाप का शिकार है, उसका शरीर जर्जर है और हम युवा भारत पर अपनी छाती चौड़ी करके घूम रहे हैं। हमें यह चिंतन करना चाहिए कि हम आने वाली पीढ़ी को अच्छी दुनिया में नहीं, अपितु खोखले विकास में जन्म दे रहे हैं। इस हकीकत पर अगर हम शर्मिंदा हों तो यह हमारी विनम्रता नहीं, अपितु ईमानदारी होगी।
’मुकुल सिंह चौहान, जामिया, दिल्ली

कामयाबी की उड़ान
भारतीय वायु सेना की जांबाजी के किस्से हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा कर देते हैं। दुनिया की चौथी बड़ी सैन्य शक्ति वाली भारतीय वायु सेना की जाबांजी के कई किस्से मशूहर हैं। 1932 में गठित भारतीय वायु सेना में साल दर साल इसकी बेहतरी का प्रयास किया गया है। किसी भी सरकार का पहला मकसद होता है कि आकाश में दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाली भारतीय वायु सेना को सवश्रेष्ठ बनाया जाए। पहले कमांडर इन चीफ एयर मार्शल सर थॉमस वाकर एमहिस्ट ने भारतीय वायु सेना को एक ऐसी सेवा के रूप में स्थापित किया जिसकी मदद से देश को सुरक्षित रखा जा सके। अपने शुरुआती दौर में भारतीय थल सेना का कमांडर इन चीफ ही भारतीय वायु सेना पर नियंत्रण रखता था।

तकनीकी मामले में कुछ देश हमारी वायुसेना से आगे हो सकते हैं, लेकिन अपने संसाधनों के सटीक प्रयोग और बुद्धिमता के कारण हमारी वायुसेना से दुश्मन देश हमेशा थर्राते हैं। करीब डेढ़ हजार विमानों से लैस भारतीय वायु सेना के बेड़े में कुछ एक ऐसे लड़ाकू विमान हैं जिन पर पूरे देश को नाज है। वायु सेना के बेड़े में चालीस सुखोई विमान शामिल हैं। जंग के दौरान हेलिकॉप्टरों की भूमिका भी काफी अहम होती है जिसे कई तरीके से काम में लिया जाता है। खास तौर पर युद्ध के स्थान पर लड़ रहे सेना के जवानों के लिए जरूरी सामान खाने-पीने की चीजें लाने और ले जाने के साथ-साथ दुर्गम स्थानों पर छिड़ी जंग में सैनिकों को ले जाने में ये हेलिकॉप्टर अहम भूमिका निभाते हैं।
’अमन सिंह, बरेली

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