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चौपाल: असुरक्षित अदालतें

ब सवाल यह उठता है कि जब देश की न्यायपालिकाएं ही सुरक्षित नहीं है, तो सरकारें आम आदमी को सुरक्षा का भरोसा कैसे दे सकती है?

अदालत में मंगलवार को भरी अदालत में एक अभियुक्त की हत्या कर दी गई।

उत्तर प्रदेश के बिजनौर सत्र अदालत में मंगलवार को भरी अदालत में एक अभियुक्त की हत्या कर दी गई। हालांकि कोर्ट परिसर में हत्या का यह पहला मामला नहीं है। ऐसे और भी मामले सामने आते रहे हैं। इसी साल जून में आगरा के बार काउंसिल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष को भी कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब सवाल यह उठता है कि जब देश की न्यायपालिकाएं ही सुरक्षित नहीं है, तो सरकारें आम आदमी को सुरक्षा का भरोसा कैसे दे सकती है? हाल में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका में यह कहते हुए अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की अपील की गई थी कि अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था रामभरोसे है।

सुरक्षा नियंत्रण व्यवस्था के नाम पर राज्य सरकारें फूली नहीं समाती है। हर साल राज्य सरकारें बजट में करोड़ों रुपए सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर आबंटित करती हैं। फिर वह पैसा जाता कहां हैं? क्या बजट में मेटल डिटेक्टर लगाने की व्यवस्था नहीं की जा सकती? हर आगंतुक की तलाशी नहीं ली जा सकती? निगरानी के लिए कैमरे नहीं लगाया जा सकता? लेकिन ऐसा होता नहीं है। शायद इसीलिए अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं और भरी अदालतों में वारदात करने से भी वे झिझकते नहीं! बिजनौर की घटना से राज्य सरकारों को सबक लेना चाहिए और आर्इंदा इस तरह की घटना न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतजाम भी करना चाहिए।
’गौतम एसआर, एमसीयू, खंड़वा परिसर

भेदभाव का विकास
आज देश की महिलाएं सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपेक्षा की शिकार हो रही हैं और दूसरी तरफ बलात्कार, छेड़छाड़ और घरेलू हिंसा जैसे अपराधों के ग्राफ में तेजी से वृद्धि हो रही है। इन सवालों की पुष्टि विश्व आर्थिक मंच की ताजा रिपोर्ट ने भी कर दी है। इस रिपोर्ट में भारत पिछले साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सूची में 108 वें स्थान पर था, लेकिन इस बार फिसल कर वह 112वें स्थान पर पहुंच गया है। इस रिपोर्ट ने देश और समाज के लिए चिंता और बढ़ा दी है। इससे साबित होता है कि महिलाओं के कल्याण के लिए सरकारी नीतियां नाकाफी हैं और नीतियों का क्रियान्वयन सही नहीं हो रहा है।

सरकारें नीतियों को बदलें और नीतियों को लागू करते समय निगरानी रखें, ताकि महिलाओं की स्थिति सुधारी जा सके। देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि जागरूकता के द्वारा महिलाओं के स्तर को सुधारने के प्रयास करें और देश में बढ़ रहे हैवानियत के तांडव की पुरजोर मुखालफत करें, ताकि महिलाओं में छिपी प्रतिभा का देश के उत्थान में योगदान सुनिश्चित किया जा सके। सवाल है कि जब तक पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ व्यापक सोच विकसित करने की ओर समाज नहीं बढ़ता है, तब तक पुरुष और स्त्री के बीच गहराते फासले को कैसे दूर किया जा सकेगा!
’हरेंद्र सिंह कीलका, सरवड़ी

नाकाम चीन
अब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत के विरुद्ध चीन लगातार वीटो का प्रयोग कर परेशान करता रहा है। लेकिन इस बार उसने कश्मीर संबंधी एक प्रस्ताव रखा तो अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस- चारों महाशक्तियों ने उसे वीटो कर दिया। नतीजतन, वह खारिज हो गया। किसी प्रश्न पर ऐसी महाशक्तियों की एकजुटता बहुत कम देखने को मिलती है। इसने चीन को अलग-थलग कर दिया। एक दौर था जब जरूरत पड़ने पर केवल रूस हमें अपने वीटो द्वारा बार-बार बचाता था। अब चार महाशक्तियां हमारा साथ दे रही हैं। जहां तक चीन का सवाल है तो चीन की असली चिंता इस समय् अर्थव्यवस्था है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दुर्गति को प्राप्त हो गई है। इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सकता है।
’आस्था गर्ग, बागपत रोड, मेरठ

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