चौपाल: जरूरी है सख्ती

क्या हम लोग अनुशासित होकर सड़क पर नहीं चल सकते? क्या बिना हेलमेट के वाहन चलाना, बाइक पर तीन या चार लोगों की सवारी करना और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना गलत नहीं है?

Author Published on: September 7, 2019 5:10 AM
1 सितंबर से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर भारी भरकम जुर्माना लग रहा है।

जब से नया मोटर यान कानून लागू हुआ है, इसकी आलोचना सुनने को मिल रही है। कुछ लोगों का चालान उनकी गाड़ी की कीमत से भी अधिक का कट गया है और मीडिया में इस तरह की खबरों को जगह भी खूब मिल रही है। लेकिन इन सबके बीच यह विचार करना आवश्यक होगा कि नया कानून लागू करके सरकार ने क्या वाकई गलत कदम उठाया है? क्या हम लोग अनुशासित होकर सड़क पर नहीं चल सकते? क्या बिना हेलमेट के वाहन चलाना, बाइक पर तीन या चार लोगों की सवारी करना और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना गलत नहीं है? क्या ऐसा करके कहीं न कहीं हम अपनी जान के साथ दूसरो की जान जोखिम में नहीं डाल रहे? जब हम बड़े परिप्रेक्ष्य में पूरे मुद्दे को देखेंगे तो हमें सरकार का ये कदम न्यायसंगत लगेगा। ये लोक लुभावन निर्णय तो नहीं है लेकिन जनहित में लिया गया बड़ा फैसला है।
’मुकेश गुप्ता, ग्रेटर नोएडा वेस्ट

जागरूक बनाना जरूरी
सरकार की कामयाबियों के फायदे तभी मिल पाएंगे जब लोग भी पूरी तरह से समझदारी से काम लें। यातायात के नए नियम और भारी भरकम जुर्माना यह बताने के लिए काफी है कि सड़कों पर चलते समय हम कितने बेखौफ और लापरवाह हो जाते हैं। अच्छी और चौड़ी सड़कें हमें तभी आगे ले जाएंगी जब हम इनके नियम-कायदों के साथ चलें, वरना नतीजे डरावने हो सकतें हैं। फिर भी यातायात में सख्ती के अच्छे नतीजों की उम्मीद भर से सरकार की कमजोरियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। महज कुछ कागजों का होना या न होना हादसों के खिलाफ गारंटी नहीं हो सकती। बेशक नियम तोड़ना जुर्म है, मगर सनद रहे कि चोर-सिपाही का खेल बड़े हादसे की वजह भी तो बन सकती है। टूटे हुए ट्रैफिक साइन बोर्ड, अधूरे रोड सिग्नल और खराब ट्रैफिक लाइटों में भी सुधार की पूरी गुंजाईश है। जुर्म और जुर्माने की आड़ में ट्रैफिक विभाग ताकत दिखाने के बजाय लोगों को जागरूक बनाए तो शायद नतीजे बेहतर होंगे।
’एमके मिश्रा, मां आनंदमयी नगर, रातू

समस्याओं में घिरा देश
आज देश के सामने गरीबी, कुपोषण, बेरोजगारी और पर्यावरण संरक्षण जैसी बड़ी समस्याएं विद्यमान हैं। नए भारत में आज भी बच्चों से लेकर बड़े तक कुपोषण के शिकार है। ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित आहार सहित प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता है। भारत की अड़सठ फीसद फीसद आबादी आज भी गरीबी रेखा के नीचे है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांक की रिपोर्ट के अनुसार देश के बाईस करोड़ से ज्यादा लोग कुपोषण के शिकार हैं जिसमें छोटे बच्चों की संख्या दस लाख है, यानी देश का हर पांचवा बच्चा कुपोषण का शिकार है। जहां तक बात है बेरोजगारी की तो इसका बड़ा कारण सरकार की आर्थिक नीतियां हैं जो रोजगार के मौके पैदा नहीं कर पा रही हैं। आज जिस तरह के मंदी के हालात बने हुए हैं उससे तो रोजगार का परिदृय और बिगड़ा है। लोगों की नौकरियां जा रही हैं। लेकिन हालात देख कर लग रहा है कि सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है।
’मनकेश्वर भट्ट, मधेपुरा

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: आस्था और पर्यावरण
2 चौपाल: विलय के बाद
3 चौपाल: नए नियम
ये पढ़ा क्या...
X