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चौपाल: आखिर सजा

देश में रोज ही बलात्कार की घटनाएं होतीं हैं मगर इस मामले में पहली बार एक वर्ग विशेष के लोग खुलकर हिंदू-मुसलमान का खेल खेलने लगे। पवित्र तिरंगे को इस वीभत्स अपराध के समर्थन में लहराया गया।

Author June 13, 2019 1:27 AM
बच्ची को 10 जनवरी को कठुआ जिले के एक गांव से अगवा किया गया था। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कठुआ बलात्कार कांड में पठानकोट की विशेष अदालत ने तीन को उम्र कैद और तीन पुलिसकर्मियों को पांच साल की सजा सुनाई है। वैसे वे सब मौत की सजा के हकदार कहे जा रहे थे। इसे अभी पूर्ण न्याय नहीं कहा जा सकता जब तक देश की अंतिम अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से इसकी पुष्टि नहीं हो जाती। वैसे तो देश में रोज ही बलात्कार की घटनाएं होतीं हैं मगर इस मामले में पहली बार एक वर्ग विशेष के लोग खुलकर हिंदू-मुसलमान का खेल खेलने लगे। पवित्र तिरंगे को इस वीभत्स अपराध के समर्थन में लहराया गया। इतना ही नहीं, जिन्हें न्याय के रखवाले कहा जाता है उनकी कौंसिल के लोगों द्वारा अदालत के भीतर बवाल मचाते हुए आरोप पत्र दाखिल होने से रोका गया। आखिर न्याय की राह में रोड़े अटकाने वालों को कब कठघरे में खड़ा किया जाएगा?
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

नशे से नाश
देश के विकास में युवा वर्ग का सबसे बड़ा योगदान होता है। स्वस्थ और तंदरुस्त युवा देश को विकास को रफ्तार दे सकते हैं लेकिन अफसोस की बात है कि आज भारत के कुछ युवा नशे के आदी होकर अपनी जिंदगी को नरक बना रहे हैं। नशा, नाश का दूसरा नाम है। जिसने भी नशे का दामन एक बार पकड़ लिया उसे नशा मौत के मुंह तक तो ले ही जाता है, साथ ही उसके घर- ारिवार का भी कई बार नाश कर देता है। नशा इंसान को हैवान भी बना देता है, हैवानियत के कारण नशेड़ी इंसान अपने परिवार के सदस्यों, यहां तक कि अपने बच्चों के साथ भी क्रूरता भरा व्यवहार करने से गुरेज नहीं करता है। मां-बाप अपने बच्चों को लाड़-प्यार से पाल कर उनके भविष्य के लिए सुनहरे सपने संजोते हैं लेकिन जब कोई बच्चा बचपन या जवानी की दहलीज पर पांव रखते ही नशे के दलदल में धंसना शुरू होकर अपनी जिंदगी बर्बाद करने लगता है तो मां-बाप के सपने उसी समय चकनाचूर हो जाते हैं।
नशे के कारण कितने ही घर बर्बाद हो गए और बहुत से नौजवान जवानी में ही कई बीमारियों के शिकार होकर मौत के मुंह में चले गए। जो लोग नशे के चंगुल में फंस चुके हैं या फंसने जा रहे हैं उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए कि नशा नाश का दूसरा नाम है।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

संचार को रफ्तार
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारा पहला लक्ष्य 100 दिन के भीतर देश में 5 जी का परीक्षण शुरू करना है और अगले साल से इस सेवा को सक्रिय करना है। 5 जी मोबाइल फोन वायरलेस सेवा की पांचवीं पीढ़ी है। पिछली पीढ़ी की तुलना में इसकी रफ्तार काफी अच्छी होगी। यह 2 जी, 3 जी और 4 जी की पूरक होगी। 5 जी टेक्नोलॉजी से इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं को बेहतर कवरेज, डेटा की उच्च सघनता मिलेगी और मोबाइल उपकरणों की बैटरी भी कम खर्च होगी। मोबाइल तकनीक की पहली पीढ़ी यानी 1जी एनालॉग सेवा थी, जिसे सेल्यूलर फोन के माध्यम से उपलब्ध कराया गया था। दूसरी पीढ़ी यानी 2जी; डिजिटल तकनीक पर आधारित सेवा थी, जिसकी स्पैक्ट्रम क्षमता, सुरक्षा और लिखित संदेश सेवा काफी बेहतर थी। 3 जी तकनीक का लक्ष्य संचार सेवाओं को तेज गति और सुरक्षा प्रदान करना था। इसके बाद आई 4 जी तकनीक आईपी यानी इंटरनेट प्रोटोकॉल सुविधा से लैस है और इसकी औसत संचार गति एक जीबीपीएस है। 5 जी मोबाइल संचार तकनीक इससे भी विकसित और तीव्र गति वाली है। यह देश में डिजिटल क्रांति में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे भारत के सामाजिक परिवर्तन का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकेगा।
’मनीष कुमार, पटना

 

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