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चौपाल: कल या आज

वहीं, दूसरी तरफ मनुष्य जिस तीव्र गति से विकास के रथ की सवारी कर रहा है उतनी ही तेजी से प्रकृति का दोहन भी कर रहा है। प्रकृति से छेड़छाड़ का ही नतीजा है कि अकेले वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख लोगों की मौत होती है।

Illustration by Manali Ghosh

टीवी चैनलों पर आयोजित बहस के संबंध में एक बात बड़ी दिलचस्प है कि दलबदलू नेताओं को जब पार्टियां अपना प्रवक्ता बना कर भेजती हैं तो उनकी बातों में कोई दम नहीं लगता क्योंकि कल तक वे जिस पार्टी में थे उसके विचारों व उपलब्धियों का बखान करते थकते नहीं थे लेकिन ठीक पार्टी बदलते ही उन्हें वह सब गलत दिखने लगता है! ऐसे में समझ नहीं आता कि वे कल सच बोल रहे थे या आज? कल झूठ बोल रहे थे या आज? क्या अपनी बोली को बदलते उन्हें शर्म नहीं आती!
’मंजर आलम, रामपुर डेहरु, मधेपुरा, बिहार

देशभक्ति बनाम गुंडई
लखनऊ में दो मेवा विक्रेताओं को महज उनकी कश्मीरी पहचान के आधार पर पीट देना निहायत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। निर्दोष कश्मीरियों को पीट कर अपनी देशभक्ति का प्रमाण देने वाले गुंडों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आज देश में जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है वह हमारे और आपके लिए काफी खतरनाक है। कल्पना कीजिए, आपको भी राह चलते कोई बगैर कसूर के पीट दे, फिर आपको कैसा लगेगा? आखिर कानून का शासन होते हुए कोई कैसे कानून को अपने हाथों में ले लेता है? बेगुनाह कश्मीरियों को पीटकर ये उन्मादी मानसिकता के गुंडे आतंकियों और पाकिस्तान का परोक्ष रूप से हौसला बढ़ा रहे हैं। महज कुछ पत्थरबाजों की वजह से हम पूरी कश्मीरी कौम को जिहादी कतई नहीं कह सकते। प्रधानमंत्री ने भी इस बात को दोहराया है कि उनकी लड़ाई कश्मीरियों से नहीं, कश्मीर के लिए है। उनके इस बयान को जमीन पर वास्तविक शक्ल देने की जरूरत है।
’कुंदन कुमार क्रांति, बीएचयू, वाराणसी

जानलेवा प्रदूषण
आज मनुष्य जिस तीव्र गति से विकास के रथ की सवारी कर रहा है उतनी ही तेजी से प्रकृति का दोहन भी कर रहा है। प्रकृति से छेड़छाड़ का ही नतीजा है कि अकेले वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख लोगों की मौत होती है। आईक्यूएयर एयर विजुअल और ग्रीनपीस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) 2018 में दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्र के रूप में उभरा है। विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित दस शहरों में से सात भारत के हैं। इनमें गुरुग्राम शीर्ष पर है। आज दुनिया की छह अरब आबादी दूषित हवा में सांस लेने को मजबूर है जिससे 800 लोगों की मौत हर घंटे हो रही है।
वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है- जीवाश्म र्इंधन, परिवहन, कूड़ा-करकट, औद्योगिक गतिविधियां आदि। दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक अहम कारण यह भी है इससे सटे हरियाणा और पंजाब में धान की कटाई के बाद जलाई जाने वाली पराली है। जहरीली हवा में लगातार सांस लेने से कैंसर, फेफड़े के गंभीर बीमारी और हृदय रोग जैसी जटिल व्याधियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद प्रदूषण की रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
’श्रीनिवास पंवार बिश्रोई, नोखा, राजस्थान

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