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चौपाल: सुरक्षा का सफर

कई लोको पायलट अपने केबिन में उच्च-स्तरीय सुविधाओं के अभाव में एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में रेल का संचालन बारिश के मौसम में करते देखे गए।

क्या यह यात्रा सुरक्षित है? कई ट्रेनों के इंजन में बरसात का पानी घुस जाता है।

भारतीय रेलवे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। इससे औसतन रोजाना 2.3 करोड़ यात्री सफर करते हैं जो आस्ट्रेलिया जैसे देशों की जनसंख्या के लगभग बराबर है, अर्थात प्रतिदिन एक ऑस्ट्रेलिया भारत की ट्रेनों में रहता है। लेकिन क्या यह सफर पूरी तरह सुरक्षित है? हम सभी बगैर हकीकत को जाने-समझे ‘मंगलमय यात्रा’ की कामना करते हैं, लेकिन किसी अनहोनी से यात्रियों का विश्वास टूट जाता है।

लगातार हादसों के बाद जांच समिति के गठन के बाद, बगैर हादसे की वजह की जांच के रेलगाड़ियां पुन: पटरी पर दौड़ने लगती हैं, और हादसे होते रहते हैं। कई लोको पायलट अपने केबिन में उच्च-स्तरीय सुविधाओं के अभाव में एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में रेल का संचालन बारिश के मौसम में करते देखे गए।

क्या यह यात्रा सुरक्षित है? कई ट्रेनों के इंजन में बरसात का पानी घुस जाता है। कभी आग तो कभी करंट लगने की आशंका बनी रहती है। कई इंजन खराब पड़े हैं, जिन्हें जल्दी ठीक करना होगा और ऐसे इंजन जो पूरी तरह खराब हैं उन्हें सेवा मुक्त कर देना होगा। बड़ी संख्या में असामाजिक तत्त्व रेलगाड़ियों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। इसे रोकने के लिए रेलवे पुलिस और संपूर्ण रेल विभाग को यात्रियों की सुरक्षा को वरीयता देते हुए कठोर कदम उठाने होंगे और विशेष रणनीति के तहत कार्य करना होगा।

उम्मीद है कि सरकार रेल विभाग को और बेहतर बनाने के तमाम छोटे-बड़े प्रयास करेगी ताकि आने वाले समय में भारतीय रेल दुनिया का सबसे बड़ा होने के साथ सबसे सुरक्षित्नेटवर्क भी कहा जा सके।

’कपिल एम.वड़ियार, उत्तर पश्चिम रेलवे, जोधपुर

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