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चौपाल: रोजगारहीन विकास व कुश्ती का अखाड़ा

आज बेरोजगारी दर पिछले चार दशकों में सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर है।

Author Published on: September 12, 2019 2:48 AM
सांकेतिक तस्वीर।

इन दिनों भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है। पिछली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में दो प्रतिशत की गिरावट देखी गई हालांकि इसे मंदी कहना जल्दबाजी होगी। कुछ लोग 2019-20 के केंद्रीय बजट को इसका कारण मानते हैं जो एक तात्कालिक कारण जरूर हो सकता है लेकिन इसका सबसे प्रमुख कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की रोजगार विहीन संवृद्धि है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि हमारी अर्थव्यवस्था के आकार में तो जरूर बढ़ोतरी हुई है पर रोजगार में लगातार गिरावट आई है। आज बेरोजगारी दर पिछले चार दशकों में सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर है। लिहाजा, अर्थव्यवस्था में मांग गिरना स्वाभाविक है हालांकि अर्थव्यवस्था की हालत को देखते हुए सरकार ने फौरी तौर पर कुछ आवश्यक कदम उठाए हैं।

वैसे तो राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के जरिए अर्थव्यवस्था में मुद्रा का प्रवाह बढ़ा कर अल्पकाल के लिए मांग को जन्म दिया जा सकता है लेकिन इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसरों का सृजन करना बहुत जरूरी है। इसके लिए रोजगार के नए विकल्पों पर विचार करने की जरूरत है।

’सिद्धांत सिंह, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

कुश्ती का अखाड़ा

पिछले कुछ वर्षों से संयुक्त राष्ट्र का हर मंच भारत और पाकिस्तान के बीच कुश्ती का अखाड़ा बन गया है। स्विट्जरलैंड में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत के खिलाफ आग उगली। उसके बाद हमारे विदेश मंत्रालय की सचिव विजय ठाकुर सिंह ने करारा जवाब दिया। जहां इस्लामाबाद की सड़कों पर लोग ताली बजाते दिखे वहीं भारत में लोग कहते सुने गए कि सचिव महोदया ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए उसे चारों खाने चित कर दिया। इसके बाद 17 से 30 सितंबर तक संयुक्त राष्ट्र की 74 वीं आमसभा होगी।
इसमें पाकिस्तान की ओर से इमरान खान और भारत की तरफ से नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे। घूम-फिर कर बात वही तू-तू मैं-मैं तक पहुंचेगी। उसके बाद किसी को कुछ हासिल नहीं होने वाला है। इसी तरह दोनों नेता तल्ख और चुटीली तकरीर करके अपने-अपने देश लौट जाएंगे। वैसे भी संयुक्त राष्ट्र आहिस्ता-आहिस्ता अप्रासंगिक होता जा रहा है।

’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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