ताज़ा खबर
 

चौपाल: आपदा को न्योता व संतुलन जरूरी

जंगलों का संरक्षण आज के समय में अनिवार्य जरूरत है। ये जंगल ही हैं जो बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं।

Author Published on: October 5, 2019 3:34 AM
बहुचर्चित नदी जोड़ परियोजना से बाढ़ की बारंबारता और सूखने वाली नदियों को आपस में जोड़ कर अतिरिक्त जल का प्रबंधन किया जा सकता है।

बाढ़ को हमेशा से प्राकृतिक आपदा के रूप में गिना जाता रहा है लेकिन हमें सोचना चाहिए कि जंगलों का विनाश तो प्राकृतिक नहीं है, कंक्रीट के जंगल प्राकृतिक नहीं हैं, नदियों पर बांध प्राकृतिक नहीं हैं और न ही वैश्विक तापमान का बढ़ना प्राकृतिक है। विकास की अंधी दौड़ में जंगलों का नाश हुआ, आधुनिक नगर बसे, उद्योगों का विकास हुआ, वैश्विक तापमान बढ़ा और जलवायु में परिवर्तन हुआ। और इन्हीं सब कारणों से बाढ़ जैसी आपदाओं की बारंबारता बढ़ी। बाढ़ पहले भी आती थीं लेकिन अब इनकी आवृत्ति से लगता है कि मानव ही इन्हें बुलाता है। बाढ़ का मुख्य कारण प्राकृतिक कम और मानव जनित ज्यादा प्रतीत होता है।

वैश्विक जलवायु में परिवर्तन और तापमान में वृद्धि के कारण ही वर्षा के समय में भी परिवर्तन हुआ है। पहले तीन ही मुख्य मौसम होते थे पर अब कई मौसम हैं। जैसे प्रचंड गर्मी है, वैसे ही ठंड है। बेमौसम बारिश का नतीजा भी बाढ़ के रूप में सामने आता है। आधुनिक शहरों का कुप्रबंधन भी बाढ़ का मुख्य कारण है, वरना तीन घंटे की बारिश में मुंबई में बाढ़ कैसे आ सकती है?

जल प्रबंधन तथा आपदा प्रबंधन के साथ-साथ कुछ महत्त्वपूर्ण उपायों के जरिए बाढ़ से बचा जा सकता है। बहुचर्चित नदी जोड़ परियोजना से बाढ़ की बारंबारता और सूखने वाली नदियों को आपस में जोड़ कर अतिरिक्त जल का प्रबंधन किया जा सकता है। छोटे व बड़े स्तर पर ‘वाटर हार्वेस्टिंग’ तकनीक के व्यापक और अनिवार्य क्रियान्वयन से अतिरिक्त जल को सीधे भूमि में स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे बाढ़ से राहत तो मिलेगी ही, भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ेगा। बाढ़ को सहने योग्य अधोसंरचना का अधिकतम निर्माण होना चाहिए जिससे बाढ़ के समय जानमाल का नुकसान कम होगा।

जंगलों का संरक्षण आज के समय में अनिवार्य जरूरत है। ये जंगल ही हैं जो बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं। आधुनिक और नवीनतम तकनीकों का प्रयोग, जैसे इसरो व भारतीय मौसम केंद्र की सहायता से बाढ़ का समय-पूर्व आकलन, बैंकिंग आदि वित्तीय संस्थाओं के प्रयोग से राहत कार्य का पैसा जरूरतमंद को तुरंत पहुंचाना आदि।

हम समझ सकते हैं कि बाढ़ एक मानव जनित आपदा के तौर पर विकराल रूप लेती जा रही है और बचाव का एकमात्र साधन यह है कि हमें विकास की दौड़ में प्रकृति को साथ लेकर चलना ही होगा। प्रत्येक व्यक्ति की ओर से थोड़ी-सी समझदारी, जागरूकता और पहल से व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।

’जितेंद्र साहू, शहडोल, मध्यप्रदेश

संतुलन जरूरी

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और देश की सुरक्षा में संतुलन जरूरी है। इसमें संदेह नहीं कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता महत्त्वपूर्ण है, लेकिन इस हद तक नहीं कि देश की सुरक्षा की अनदेखी कर दी जाए। इससे इनकार नहीं कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैैं, लेकिन इनका मकसद लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन करना नहीं, बल्कि शांति एवं व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

इसे सुनिश्चित करने में इसलिए बाधाएं आ रही हैं कि कुछ लोग अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे तत्त्वों पर लगाम लगाना सरकार का दायित्व है। इसी तरह उन तत्त्वों पर भी लगाम लगाना आवश्यक है जो न केवल अलगाववादियों और आतंकवादियों की भाषा बोलने में लगे हुए हैैं, बल्कि उनके हितैषी भी बने हुए हैैं।

’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 चौपाल: बच्चों की खातिर व अपना गिरेबां
2 चौपाल: नापाक मंसूबे व अमन का रास्ता
3 चौपाल: सिद्धांत के बिना व शरणार्थी बनाम घुसपैठिए