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चौपाल: इंटरनेट की लत, मुफ्त का नुकसान व बड़ा कदम

युवाओं के अलावा बच्चे भी अब डिजिटल लत का शिकार हो रहे हैं।

Author Published on: September 10, 2019 5:46 AM
सांकेतिक तस्वीर।

‘देश में प्रतिदिन 1.5 जीबी का इंटरनेट डेटा युवाओं को उनकी बेरोजगारी का अहसास नहीं होने दे रहा है!’ इस गंभीर बात के स्पष्ट रूप से दो पहलू हैं। एक तरफ देश में तेजी से बेरोजगारी बढ़ रही है तो दूसरी तरफ युवाओं की एक बड़ी संख्या ‘साइबर एडिक्शन’ यानी इंटरनेट के आभासी संसार में रमे रहने की लत की तरफ बढ़ रही है। फिलहाल हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत का शिकार हो चुका है। यह संकट भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से फैलता जा रहा है और अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि युवाओं में बेरोजगारी सहित देश की वास्तविक समस्याओं के प्रति सोचने और समझने की क्षमता ही खत्म हो रही है। मशहूर लेखक निकोलस कार ने मन-मस्तिष्क पर इंटरनेट के प्रभाव पर अपनी चर्चित पुस्तक‘दि शैलोज’ में कहा है, ‘इंटरनेट हमें सनकी बनाता है, तनावग्रस्त करता है, हमें उस ओर ले जाता है जहां हम इसी पर निर्भर हो जाएं।’

भारत में बेहद सस्ती दरों पर उपलब्ध डेटा की वजह से गरीब तबके के लोगों के पास भी स्मार्टफोन आ गए हैं जिनका सदुपयोग के बजाय कुछ स्तर तक दुरुपयोग भी होने लगा है। दुनिया में नशीले पदार्थों का कारोबार जिस तेजी से फैल रहा है, उससे कहीं अधिक रफ्तार से लोग सोशल मीडिया की गिरफ्त में फंस रहे हैं। युवाओं के अलावा बच्चे भी अब डिजिटल लत का शिकार हो रहे हैं। अमेरिका सहित कई देशों में तो इसके इलाज के लिए बाकायदा क्लीनिक भी खुल गए हैं, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में अभी तक इस पहलू पर गंभीरता से सोचा ही नहीं गया है। वक्तआ गया है जब इस समस्या का समाधान तलाशा जाए, नहीं तो युवा शक्ति विकास के बजाय विनाश पर उतारू हो सकती है।

’सोनू कुमार सोनी, बेतिया, बिहार

मुफ्त का नुकसान

दिल्ली में केजरीवाल सरकार द्वारा महिलाओं को मैट्रो और सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा कराने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने वाजिब सवाल उठाया है। दिल्ली सरकार ने आगामी चुनावों में जीत हासिल करने के लिए घोषणा तो कर दी कि महिलाओं को मैट्रो और सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी पर वह भूल रही है कि हमारा देश पहले ही आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। ऐेसे में मुफ्त की सुविधा के फैसले सरकार व देश की आर्थिक स्थिति पर भाड़ी पड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि वे इस तरह मुफ्त की सौगात नहीं बांट सकते, सोलह आने सही है क्योंकि इससे दिल्ली मैट्रो को बहुत नुकसान होगा और वह घाटे में आ जाएगी।
’जानवी बिट्ठल, जालंधर

बड़ा कदम

तीन तलाक के खिलाफ बने कानून ने करोड़ों मुसलिम माताओं-बहनों के लिए न्याय और सम्मान से जीने की राह खोल दी है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बहुत बड़ा कदम है। यह कानून बनने के बाद करोड़ों मुसलिम महिलाएं जिनमें अधिकतर गरीब वर्ग की ही पीड़ित होती हैं, सम्मान के साथ रह पाएंगी। इसके साथ ही सरकार को मुसलिम महिलाओं की शैक्षिक दशा सुधारने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए।
’वेद प्रकाश, गुरुग्राम, हरियाणा

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