चौपाल: इंटरनेट की लत व रोजगार का सवाल

आज तेजी से बढ़ती तकनीक ने हमें बहुत कुछ दिया तो जरूर है, पर साथ ही बहुत कुछ हमसे छीना भी है।

दूर-दराज के युवा तो आज इंटरनेट के जरिए पढ़ाई भी करने लगे हैं।

एक तरफ जहां देश में लगातार बेरोजगारी बढ़ती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ हाल ही में आई कुछ रपटों में दावा किया गया है कि ‘इंटरनेट एडिक्शन’ यानी इंटरनेट की लत का शिकार सबसे ज्यादा हमारे देश के युवा हैं। ये वही युवा हैं जिनके दम पर भारत न सिर्फ आगे बढ़ने का सपना संजोए है लेकिन ये तो सोशल मीडिया पर बासी चुटकुले और हास्य विडियो ‘शेयर’ करके लोगों का मनोरंजन करने में व्यस्त हैं। सोशल मीडिया पर उनके पास दुनियाभर से चीजें आ रही हैं लेकिन उनके परिवार में क्या चल रहा है उन्हें उसकी खबर तक नहीं।

आज तेजी से बढ़ती तकनीक ने हमें बहुत कुछ दिया तो जरूर है, पर साथ ही बहुत कुछ हमसे छीना भी है। सोशल मीडिया पर बहुत से लोग तो ऐसे होते हैं जिन्हें हम जानते-पहचानते तक नहीं पर फिर भी उन पर लगातार भरोसा किए जाते हैं। उनसे अपनी हर जानकारी साझा करने में लगे रहते हैं जो हमारे लिए कई बार नुकसानदेह भी साबित होती है। इसके चलते हम साइबर ठगी के शिकार हो जाते हैं। सोशल मीडिया ने आज हमें संवेदनहीन बना दिया है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सब अपनी छोटी-सी दुनिया में ही सिमटते जा रहे हैं। हम अपने दुख-सुख के पलों को परिवार से ज्यादा सोशल मीडिया पर साझा करने को बेताब दिखाई देते हैं।

इंटरनेट की लत का यह संकट भारत सहित पूरी दुनिया पर तेजी से गहराता जा रहा है। अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि युवाओं में बेरोजगारी सहित देश की वास्तविक समस्याओं के बारे में सोचने-समझने तक की क्षमता खत्म होती जा रही है। युवाओं में इंटरनेट की लत की एक बड़ी वजह बेहद सस्ती दरों पर उपलब्ध इंटरनेट डेटा भी है। हालांकि अब टेलीकॉम कंपनियां घाटे को देखते हुए अपने शुल्कों में लगातार बढ़ोतरी कर रही हैं पर फिर भी कंपनियों द्वारा मिलने वाला असीमित डाटा हमें इंटरनेट की लत का शिकार बना रहा है।

इंटरनेट जानकारी का सबसे अच्छा स्रोत है, बहुत से लोग इस मंच पर आकर अपने हुनर को दुनिया के सामने लाने का काम कर रहे हैं। दूर-दराज के युवा तो आज इंटरनेट के जरिए पढ़ाई भी करने लगे हैं। पर ज्यादातर लोग इस आभासी दुनिया में आकर कब दिशा से भटक जाते हैं उन्हें पता ही नहीं चलता। आज नशीले पदार्थों की जगह लोग इंटरनेट के नशे का शिकार हो रहे हैं।

कई देशों में तो इंटरनेट के इस नशे से छुटकारा दिलाने के नाम पर बकायदा क्लीनिक भी खोल दिए गए हैं जिनकी महंगी फीस चुका कर लोग इस नशे से मुक्ति पा रहे हैं। यदि हम इस समस्या को लेकर आज गंभीर नहीं हुए तो हो सकता है कि हमारी युवा शक्ति जाने-अनजाने विकास की बजाय विनाश के रास्ते पर अग्रसर हो चले। फोन से दुनिया को मुट्ठी में कर लेने का दम वाले युवा कब फोन की मुट्ठी में सिमट कर रह जाएंगे उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं होगा।

’रोहित यादव, महर्षि दयानंद विवि, रोहतक

रोजगार का सवाल

भारत में बेरोजगारी एक ज्वलंत समस्या है। बेरोजगारी से ही देश में अराजकता बढ़ी है। इसका गरीबी से भी घनिष्ठ संबंध है। प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने के इच्छुक लोगों को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है। बेकारी और अर्द्ध-बेकारी किसी भी देश की समृद्धि के लिए बाधक हैं। दोषपूर्ण आर्थिक नियोजन, कुटीर उद्योगों की खराब हालत और पेशेवर शिक्षा की कमी से बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है। आंकड़े बताते हैं कि भारत दुनिया का सबसे अधिक बेरोजगारों वाला देश है। यहां निजी क्षेत्र की अपेक्षा सरकारी नौकरी हर किसी की पसंद है। यही कारण है कि राज्य या केंद्र सरकार की भर्तियों में लाखों उच्च शिक्षित युवाओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। आखिर इस समस्या के ठोस समाधान की दिशा में हमारी सरकारें कब गंभीर होंगी?

’नीतीश कुमार पाठक, आश्रम, नई दिल्ली

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