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सतर्कता की दरकार

दुनिया को भी यह संदेश जाना ही चाहिए कि आज का भारत नए मिजाज का भारत है। इस बदले हुए मिजाज का परिचय देने में राजनीतिक नेतृत्व की महती भूमिका है। इस भूमिका के निर्वाह के लिए केवल राजनीतिक परिपक्वता का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए, बल्कि सेना की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की तत्परता भी दिखाई जानी चाहिए।

Author March 5, 2019 4:05 AM
पीएम मोदी (बाएं) और पाकिस्तान के पीएम इमरान खान (दाएं)(file pic)

आज जितनी जरूरत पाकिस्तान के सैन्य दुस्साहस से सावधान रहने और उसे करारा जवाब देने की है, उतनी ही उसके छल-प्रपंच से सतर्क रहने की भी है। हर नागरिक को सजग रहना होगा ताकि देश में शांति और सद्भाव बना रहे। इससे सेनाओं को हर चुनौती का सामना करने का संबल मिलेगा। पाकिस्तान के साथ दुनिया को भी यह संदेश जाना ही चाहिए कि आज का भारत नए मिजाज का भारत है। इस बदले हुए मिजाज का परिचय देने में राजनीतिक नेतृत्व की महती भूमिका है। इस भूमिका के निर्वाह के लिए केवल राजनीतिक परिपक्वता का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए, बल्कि सेना की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की तत्परता भी दिखाई जानी चाहिए। यह ठीक नहीं कि जब देश युद्ध जैसे हालात से दो-चार है, तब वायुसेना को निर्णायक मजबूती देने वाले राफेल विमानों का सौदा अदालत में है। ऐसी राजनीति राष्ट्र हित में बाधक है।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर

मिग की मार
अच्छी तकनीक के सफलतापूर्वक संचालन के लिए कुशल प्रशिक्षण की जरूरत होती है जिसकी एक पहल हाल के समय में भारतीय मिग-21 द्वारा पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराए जाने के रूप में देखने को मिलती है। यह सर्वविदित है कि अमेरिकी एफ-16 विमान रूसी विमान मिग-21 की तुलना में आधुनिक तकनीकों से लैस हैं। पाकिस्तान ने 1982-83 के दौरान अमेरिका से लगभग 80 एफ-16 विमान खरीदे थे जिनमें प्रत्येक की कीमत लगभग 18 मिलियन डॉलर थी। तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका पुरजोर विरोध किया था। सन 1961 में भारत ने रूस से मिग-21 को खरीदा जिसकी कीमत प्रति विमान लगभग दो मिलियन डॉलर थी और 1964 में सुपर सोनिक लड़ाकू विमान के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था ।
हालांकि प्रशिक्षित पायलटों और संसाधनों की कमी के कारण 1964 के भारत-पाक युद्ध में मिग-21 की सीमित भूमिका रही थी फिर भी मिग-21 का अतीत चुनौतियों से भरा रहा क्योंकि इसने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तान के एफ-104 स्टार फाइटर, एफ-6 और सी-130 हर्कुलस को कड़ी मात दी थी। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान कच्छ के रण में मिग-21 ने पाकिस्तान की ब्रिगेड अटलांटिक पनडुब्बी को ध्वस्त किया था। पिछले दिनों भारतीय वायु सेना के जांबाज विंग कमांडर अभिनंदन ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए एफ-16 विमान को मार गिराया जिससेअमेरिका सहित विश्व की तमाम महाशक्तियां स्तब्ध रह गर्इं कि कैसे लगभग 60 साल पुराने रूसी मिग-21 ने अत्याधुनिक तकनीकों से लैस अमेरिकी एफ-16 को मार गिराया! अभिनंदन ने अपने कौशल और पराक्रम का परिचय देते हुए संसार में भारतीय वायु सेना का लोहा मनवाया है।
’सुशील प्रभाकर, जालौन, उत्तर प्रदेश

किसलिए कर्ज
वर्ष 2016 से 2018 तक बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज में नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की वृद्धि हुई है जो निश्चय ही सम्मानजनक दिखती है लेकिन इसमें अधिकतर हिस्सा व्यापारिक, व्यक्तिगत और मकान खरीदने के लिए कर्ज आदि का है। अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्र यानी उद्यम, पर्यटन और प्रौद्योगिकी में बैंक कर्ज की वृद्धि दर मात्र 0.5 प्रतिशत प्रति वर्ष रही है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था के उत्पादक हिस्से मंद पड़े हुए हैं। लोगों द्वारा खपत के लिए कर्ज लिया जा रहा है न कि उत्पादन के लिए। ऐसा संभव है कि लोगों की आय कम होने के कारण वे ऋण लेकर खर्च चला रहे हों। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लोगों को फैक्ट्री जैसे उद्योगों के लिए ऋण लेना चाहिए जबकि ऐसा नहीं हो रहा। इसलिए व्यापार के बढ़ते सूचकांक को अर्थव्यवस्था से जोड़ना अनुचित है। अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो मंदी बढ़ती जाएगी और देश विकासशील ही बन कर रह जाएगा। सरकार को इस पर गौर करना चाहिए।
’वाजिद अली, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

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