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चौपाल: इस बजट में

इस बजट ने आम आदमी पर प्रत्यक्ष भार नहीं बढ़ाया है और छोटे व्यापारियों व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन के माध्यम से राहत पहुंचाने और दो नंबर के व्यवसाय पर अंकुश की स्वागत योग्य पहल की गई है।

Author July 6, 2019 2:11 AM
निर्मला सीतारमण का वित्त मंत्री के रूप में यह पहला बजट है। (फोटोः एएनआई)

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने करदाताओं का स्वागत करते हुए अपने बजट को गांव, गरीब व किसान हितैषी निरूपित किया है। स्वाभाविक रूप से उनके शुरुआती निशाने पर वे लोग थे जो किसी न किसी तरह कर चोरी करते हैं या कर चोरी को प्रोत्साहित करते हैं। बजट के प्रथम हिस्से में उन्होंने सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं की ओर इशारा करते हुए नई शिक्षा नीति, श्रम कानूनों में बदलाव, सार्वजनिक क्षेत्र की जमीन पर सस्ती आवासीय योजना, अंतरिक्ष में ताकत बढ़ाना, उड्डयन और मीडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी, आदर्श किराया कानून, 2022 तक हर घर को बिजली, दो साल में 1.95 करोड घर, ग्रीन टेक्नोलॉजी से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाना, एक हजार किसान उत्पादक समिति बनाना, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाना, स्टार्टअप के लिए दूरदर्शन चैनल, सभी मंत्रालयों के फंड को एनआरएफ से जोड़ने, तीन करोड़ दुकानदारों को पेंशन, असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पेंशन, नारी से नारायणी, भारतीय पासपोर्ट धारक अनिवासी भारतीयों को आधार कार्ड जारी करने, स्टडी इन इंडिया, एक लाख पांच हजार करोड़ का सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश, एअर इंडिया का विनिवेश, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए सत्तर हजार करोड़ की पूंजी आदि की जानकारी प्रस्तुत की। सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि पांच वर्ष पूर्व विश्व के 200 श्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में हमारा एक भी संस्थान नहीं था, पर आज दो आइआइटी व एक आइआइएम मिलाकर हमारे तीन क्षैक्षणिक संस्थान विश्व के प्रथम 200 संस्थानों में हैं। बैंकिग क्षेत्र में पिछले वर्ष एक लाख करोड़ की कमी एनपीए में हुई है।

बजट के दूसरे हिस्से में वित्तमंत्री ने बताया कि प्रत्यक्ष कर वसूली में पांच वर्ष में 78 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। व्यक्तिगत आयकर की दर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, 45 लाख तक ग्रह ऋण लेने वालों के लिए ब्याज छूट का लाभ दो लाख से बढ़ा कर तीन लाख पचास हजार किया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटा कर 5 प्रतिशत किया गया है। आयातित किताबों पर पांच फीसद, स्वर्ण व अन्य मूल्यवान धातुओं पर 10 फीसद से बढ़ा कर 12.5 फीसद और पेट्रोल पर एक रुपया अधिभार बढ़ाया गया है। नकद लेन-देन को निरुत्साहित करने के लिए एक करोड़ रुपए से अधिक बैंक निकासी पर 2 फीसद कर प्रस्तावित किया गया है और दो से पांच करोड़ करयोग्य आय पर तीन फीसद और पांच करोड़ से अधिक करयोग्य आय पर सात फीसद सरचार्ज प्रस्तावित किया गया है।

इस बजट ने आम आदमी पर प्रत्यक्ष भार नहीं बढ़ाया है और छोटे व्यापारियों व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन के माध्यम से राहत पहुंचाने और दो नंबर के व्यवसाय पर अंकुश की स्वागत योग्य पहल की गई है। मोटे तौर पर यह निजीकरण और विदेशीकरण को बढ़ावा देने वाला बजट है। यह बेरोजगारी की समस्या को हल करने में सहायक नहीं दिखता है और महंगाई को बढ़ावा देगा।
’सुरेश उपाध्याय, गीतानगर, इंदौर

 

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