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चौपाल: अमेरिका के साथ

अगले साल अमेरिका में चुनाव होने जा रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी वहां बसे भारतीय मूल के लोगों में वोट बैंक नजर नजर आ रहा है।

Author नई दिल्ली | September 24, 2019 3:35 AM
ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान एक मंच पर दिखे पीएम मोदी व डोनाल्ड ट्रम्प। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में दो शासनाध्यक्षों की मित्रता के रूप में पचास हजार दर्शकों के बीच आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम वास्तव में भारत-अमेरिका के सांस्कृतिक संबंधों की सकारात्मकता का उदाहरण है। यह अलग बात है कि अगले साल अमेरिका में चुनाव होने जा रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी वहां बसे भारतीय मूल के लोगों में वोट बैंक नजर नजर आ रहा है। अगर ऐसा है भी तो भारतीय नजरिए से गलत क्या है। ये लोग पहले से वहां बसे हैं और भारत-अमेरिका संबंध अब तक उतार-चढ़ाव के रूप में ही दिखता रहा है। यदि इन नागरिकों की बदौलत भारत अमेरिका संबंधों के विभिन्न आयामों में प्रगाढ़ता आती है तो वहां बसे लाखों भारतीय को भी अपनापन का एहसास होगा। भारतवंशी अपने देश के नेता को सुनने आए थे। ऐसे में अमेरिकी यदि भारत के प्रधानमंत्री के प्रशंसक हो जाते हैं तो भारत को इससे लाभ ही हैं। प्रधानमंत्री ने वहां आतंकवाद का मुद्दा उठाया और अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इस मुद्दे पर भारत के साथ मिल कर काम करने का जो भरोसा दिया वह भारत के लिए बेहतर ही है। ऊर्जा के मसलों पर दोनों राष्ट्रों के मध्य हो रही साझेदारी ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के लिए विकल्पों का बेहतर मार्ग प्रशस्त करेगा।
’मिथिलेश कुमार, भागलपुर, बिहार

जिम्मेदार कौन
कोलकाता का जाधवपुर विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में घिरा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम में जब स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ दुर्व्यवहार हुआ और उन्हें बंधक बना लिया गया। हालांकि उन्होंने इसकी कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। किंतु ऐसा करने वाले विश्वविद्यालय के विद्यार्थी थे या बाहरी लोग, यह जांच का विषय है। यह समझने वाली बात है कि जेएनयू जैसा दिल्ली का विश्वविद्यालय जिसमें हजारों विद्यार्थी पढ़ते है, भारत का नाम ऊंचा करते है, किंतु कुछ अतिवादी तत्वों के कारण विश्वविद्यालय बदनाम हो जाते हैं। ऐसे असामाजिक तत्वों को कौन संरक्षण देता है? इनके रक्षा कवच को तोड़ कर ऐसे लोगों को दंडित करना आवश्यक है, क्योंकि इस तरह के तत्व समाज में समरसता और स्नेह के वातावरण को दूषित करते हैं और शिक्षण संस्थानों को गलत दिशा में ले जा रहे है। यही कारण है कि विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों की सूची में भारत के विश्वविद्यालयों का स्तर बहुत नीचे आ गया।
’मंगलेश सोनी, मनावर, धार

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