ताज़ा खबर
 

चौपाल: कैसे बचे पर्यावरण

इंसान को अगर अपना भविष्य खुशहाल और कई बीमारियों रहित रखना है तो पर्यावरण को बचाना ही होगा। आज जिस तरह का गंभीर पर्यावरण संकट है उसमें तो रोज ही पर्यावरण दिवस मनाया जाना चाहिए।

Author June 5, 2019 2:04 AM
पर्यावरण के लिए विशेष अभियान चलाने चाहिए।

पिछले कुछ दिनों से उत्तर भारत के बहुत से राज्य भीषण गर्मी की चपेट में हैं। कुछ जगहों पर तो लू से मौतों की भी खबर है। इस भीषण गर्मी के लिए कोई और नहीं, बल्कि हम खुद जिम्मेदार हैं। भौतिकतावाद और आधुनिकता की अंधी दौड़ में इंसान ने पर्यावरण को बेहद खराब कर दिया है। पर्यावरण को बचाने के मकसद से हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण को लेकर आज पूरी दुनिया चिंतित है। जिस तरह साफ-सुथरा खाना, पीने का साफ पानी इंसान की उम्र बढ़ाता है, उसी प्रकार साफ-सुथरा पर्यावरण भी इंसान की जीवन में खुशहाली लाता है। इंसान को अगर अपना भविष्य खुशहाल और कई बीमारियों रहित रखना है तो पर्यावरण को बचाना ही होगा। आज जिस तरह का गंभीर पर्यावरण संकट है उसमें तो रोज ही पर्यावरण दिवस मनाया जाना चाहिए। समाज सेवी संस्थाओं को भी लोगों को जागरूक करने के लिए पर्यावरण के लिए विशेष अभियान चलाने चाहिए।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

बातें नहीं, काम
पर्यावरण दिवस आते ही सब नसीहत देने में लग जाते हैं कि ऐसा करना चाहिए, वैसा करना चाहिए। पर असल में खुद कभी कोई प्रयास नहीं करता, बस दूसरों से उम्मीद रहती है कि जो करें दूसरे करें, हम तो केवल हुकुम देंगे। क्यों भला? आप इस दुनिया के नहीं हो क्या या आपको पर्यावरण की जरूरत नहीं हैं? हर कोई अपने स्तर पर काम कर रहा है। सरकार नई योजनाएं बना रही है, गैर सरकारी संस्थान अपने ढंग से पर्यावरण सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। अगर कोई कुछ नहीं कर रहा तो वो हैं हम और आप जैसे लोग हैं। हर बार का यही मुद्दा होता है कि पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए सबको मिलजुल कर प्रयास करना होगा। हर साल पर्यावरण दिवस पर यह शपथ ली जाती है कि पर्यावरण को सुरक्षित करने में सब अपना सहयोग देंगे, पर यह शपथ जिस दिन ली जाती है उसके अगले दिन तक सब भूल भी जाते हैं। ऐसे में पर्यावरण कैसे सुरक्षित हो सकता है? पर्यावरण किसी एक की नहीं, बल्कि सबकी जिम्मेदारी है तो काम भी सबको मिल कर करना पड़ेगा।
’गीता, दिल्ली विवि

दोहन रोकना जरूरी
इस साल पर्यावरण दिवस की महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है कि इस बार इसका विषय ‘वायु प्रदूषण’ है। आज वायु प्रदूषण विश्व की सबसे गंभीर समस्या है। उद्योगों का व्यापक प्रसार, धुआं छोड़ने वाली वाहनों की संख्या में अनियमित वृद्धि, वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और ऊर्जा के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अनैतिक दोहन, वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। ऐसे में विश्व पर्यावरण दिवस संपूर्ण विश्व को न केवल दूषित होती जीवनदायनी हवा के प्रति सतर्क करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण हेतु पूरे विश्व को साथ आकर तत्काल प्रभावी कदम उठाने के लिए भी प्रेरित करता है। यदि समय रहते हमने पर्यावरण संरक्षण की और मजबूत प्रतिबद्धता नहीं दिखाई और इसके अनैतिक दोहन को नहीं रोका तो हमारी भावी पीढ़ियां कहीं ज्यादा कष्ट झेलेंगी।
’अंकित कुमार मिश्रा, बंगलूरू

समस्या और समाधान
सार्वजनिक परिवहन सेवा की महत्ता को समझते हुए ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं के लिए मेट्रो और डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बेहतर विकल्प बताया है। लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर यह तर्क कुछ कमजोर लगता है। गौरतलब है कि सार्वजनिक बस और मेट्रो में सफर करते हुए महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार कहीं ज्यादा होता है। हालांकि बसों में मार्शलों की व्यवस्था की गई है, वह भी केवल शाम की शिफ्ट तक ही सीमित है। डीआईएमटीएस बस सेवा में तो मार्शल होते ही नहीं हैं। शायद दिल्ली सरकार को लगता है कि इन बसों में महिलाएं सफर ही नहीं करती हैं या फिर इन बसों में बदमाश सफर नहीं करते हैं। अगर माननीय मुख्यमंत्री इतना बड़ा फैसला ले सकते हैं तो यह फैसला पिछले ही साल ही क्यों नहीं लिया था? यह प्रस्ताव एकतरफा और बिना किसी तैयारी के आनन-फानन में लिया जान पड़ता है।
’आसिफ सैफी, दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X