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चौपाल: स्वास्थ्य की सुध व विरोध और राजनीति

भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है, पर अभी भी इस क्षेत्र में काफी काम बाकी है।

Updated: January 21, 2020 1:26 AM
टेलीमेडिसिन सेवा का उपयोग करके देश के सुदूर भागों और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा में गुणात्मक सुधार ला सकते हैं।

हमारे देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित सबसे प्रमुख चुनौती है आबादी के अनुपात में अस्पतालों और डॉक्टरों की कमी। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं, आधारभूत संरचना, दवाइयों, कुशल व प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य सुविधाओं की भारी कमी है। इसके मद्देनजर टेलीमेडिसिन सेवा का उपयोग करके देश के सुदूर भागों और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा में गुणात्मक सुधार ला सकते हैं। हमें चिकित्सा की ऐलोपैथिक पद्धति के अलावा उपलब्ध अन्य पद्धतियों पर भी जोर देना चाहिए, जैसे- आर्युर्वेद, योग, होम्योपैथी आदि। वैकल्पिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के लिए भी प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और प्रसिद्ध व्यक्तियों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हुई बातों का रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

आज देश के सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 1.4 फीसद चिकित्सा सेवा में खर्च किया जाता है। इसे बढ़ाने की काफी जरूरत है तभी आबादी के अनुपात में डॉक्टर, अस्पताल और अन्य सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। सरकार को यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि निजी चिकित्सा उद्योग क्षेत्र सिर्फ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहे बल्कि यह अपनी सुविधाओं का विस्तार छोटे एवं पिछड़े शहरों में भी करे। सरकार को यह भी देखना चाहिए कि निजी अस्पताल वे मरीजों से मनमानी रकम न वसूल सकें। इसके लिए भी समुचित तंत्र की व्यवस्था की जानी चाहिए।

निष्कर्षत: आज देश को एक ऐसी स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता है जो मौजूदा समय की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो और लगातार परिवर्तित हो रहे परिवेश में उत्पन्न संक्रामक बीमारियों से रक्षा कर सके। भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है, पर अभी भी इस क्षेत्र में काफी काम बाकी है। देश में स्वास्थ्य संरचना, उपचार परीक्षण और शोध की दिशा में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि सबके लिए स्वास्थ्य का सपना साकार हो सके।
’सूर्यभानु बांधे, रायपुर, छत्तीसगढ़

विरोध और राजनीति

देश में अलग-अलग जगह हो रहा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। विरोध इस कदर बढ़ गया है कि लोग महीनों से सड़क जाम कर बैठे हुए हैं। इससे आने-जाने वालों को भारी यातायात जाम और परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। भारत देश एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें अपनी आवाज उठाने का सबको हक है। लेकिन हमें समझना होगा कि दुनिया के सौ से ज्यादा देशों में एनआरसी लागू है। जब कोई नई चीज बनती है तो उसमें कुछ खामियां हो सकती हैं लेकिन उसका पूरी तरह विरोध करना गलत है। यह देश हम सबका है, हम बदलाव के लिए सुझाव दे सकते हैं। इस वक्त विरोध कम राजनीति ज्यादा हो रही है।

इन दिनों धरने पर आ रहे छोटे-छोटे बच्चों के अंदर जहर भरा जा रहा है। जिन बच्चों को स्कूल में होना चाहिए वे धरने में आ रहे हैं। इस समय सरकार की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह लोगों को आकर समझाए और उनसे संवाद करे। हम सबको समझदारी से काम लेने की जरूरत है।
’आशीष गुसार्इं, दिल्ली विश्वविद्यालय

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