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चौपाल : न्याय का तकाजा

जब कोई नामचीन हस्ती यौन उत्पीड़न के आरोपों से दो-चार होती है तो देश भर में शोर मच जाता है और उसके मामले में अलग व्यवहार होता है लेकिन जब कोई आम आदमी इस तरह के आरोपों का सामना करता है तो वह आरोप सिद्ध हुए बगैर दंडित हो जाता है।

Author April 24, 2019 1:50 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न एक हकीकत है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए किसी सुनिश्चित प्रक्रिया का अभाव रहा है। जब कोई नामचीन हस्ती यौन उत्पीड़न के आरोपों से दो-चार होती है तो देश भर में शोर मच जाता है और उसके मामले में अलग व्यवहार होता है लेकिन जब कोई आम आदमी इस तरह के आरोपों का सामना करता है तो वह आरोप सिद्ध हुए बगैर दंडित हो जाता है। साफ है कि इस तरह के आरोपों की जांच के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था बनाने की दरकार है जिससे एक ओर जहां यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को न्याय मिले वहीं दूसरी ओर कोई झूठे आरोपों का शिकार न बनने पाए।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

समस्याओं का सच
हमारे देश में ऐसी-ऐसी समस्याओं ने जन्म ले लिया है जिन्हें कभी समस्या के रूप में देखा-सोचा-समझा ही नहीं गया था। आज वे समस्याएं इतना विकराल रूप ले चुकी हैं कि हर कोई उनसे जूझ रहा है। मसलन, देर रात तक नींद न आना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, तनाव, हताशा, उलझन, मोटापा आदि। हमारे यहां की जीवन शैली की संसार के सभी पारंपरिक और प्रगतिशील राष्ट्रों से तुलना की जाए तो वह ज्यादा स्वास्थ्यकर और सरल मालूम पड़ेगी। उपर्युक्त समस्याओं के लिए हमारे यहां कहीं कोई जगह ही नहीं थी। हमारे जीवन मूल्य भी इन्हीं जीवन शैलियों को ध्यान में रख कर निर्धारित किए गए हैं। आज के विखंडनीय समाज और गलाकाट प्रतिस्पर्धा में शरीर और मन दोनों के संतुलन की उपेक्षा की गई। ‘विश्वग्राम’ की अवधारणा सभी को एक साथ एक मंच पर लाई तो जरूर है लेकिन सुरसा की भांति बढ़ती आकांक्षाओं की प्रतिपूर्ति ने सुकून और शांति का गला घोंट कर रख दिया है।
’सुुबोध ‘शाक्य’, बीएचयू, वाराणसी

तब से अब
सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना मामले में घिरते देख कर कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखित माफी मांग ली है, लेकिन ताजा घटनाक्रम में उन्होंने अपने बयानों में कोर्ट का हवाला देने के बजाय बिना सबूत के ‘चौकीदार चोर है’ सरीखे आरोप को और भी तेज स्वर में अलापना शुरू कर दिया है। राफेल सौदे पर अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देने की बजाय फ्रांस के राष्ट्रपति का हवाला देना आरंभ कर दिया है। लेकिन देश की जनता जानती है कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने राफेल सौदे में केंद्र सरकार के विरुद्ध एक शब्द नहीं बोला है, फिर भी कांग्रेस अध्यक्ष मतदाताओं को बरगलाने का कोई अवसर चूकना नहीं चाहते। दरअसल, उन्हें ये बिना सबूत के आरोप इसलिए लगाने पड़ रहे हैं कि मौजूदा केंद्र सरकार पर अब तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप साबित नहीं होने से कांग्रेस बुरी तरह तिलमिलाई हुई है। इन बिना सबूत के आरोपों के पीछे उनके पिता पर लगे बोफर्स तोप खरीद मामले कमीशन खोरी के आरोप भी हैं जिसके कारण कांग्रेस को लोकसभा में रिकार्ड बहुमत होते हुए भी दूसरा कार्यकाल नसीब नहीं हो सका, हालांकि बोफर्स के आरोप साबित नहीं हो पाए थे। कांग्रेस अध्यक्ष जानते हैं कि किस प्रकार वीपी सिंह ने बोफर्स कमीशन कांड को मुद्दा बनाकर जबरदस्त बहुमत प्राप्त सरकार को धराशायी कर दिया था। लेकिन नहीं भूलना चाहिए कि तब से अब तक गंगा-जमुना में बहुत पानी बह चुका है और अब झूठे व बेबुनियाद आरोप लगाकर न तो सत्ता हथियायी जा सकती है और न मतदाताओं का दिल जीता जा सकता है।
’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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