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चौपाल: रहने लायक व प्रदूषण का जहर

भारत में लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार, जघन्य हत्या और मानव तस्करी की अनवरत घटनाएं हो रही हैं।

नन्हे बच्चों को पौष्टिक आहार व दवाओं से सुरक्षा देने के मामले में तो भारत की हालत अफ्रीकी गरीब देश केन्या और मिस्र से भी बुरी है।

अमेरिका के यूएस न्यूज, वर्ल्ड रिपोर्ट व वॉर्टन स्कूल के संयुक्त सर्वेक्षण में भारत को 73 देशों की वैश्विक सूची में ‘रहने लायक देश’ के लिह़ाज से 25वां स्थान मिला है। इससे पहले 2018 में थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत महिलाओं के लिए विश्व में सबसे ‘असुरक्षित’ और ‘खतरनाक’ देश है। नन्हे बच्चों को पौष्टिक आहार व दवाओं से सुरक्षा देने के मामले में तो भारत की हालत अफ्रीकी गरीब देश केन्या और मिस्र से भी बुरी है। वैश्विक स्तर पर इस मामले में भारत 59 वें पायदान पर है।

पश्चिम एशिया के मुसलिम बहुल सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कम स्त्री स्वतंत्रता वाले देशों की तुलना में, भले ही वे भारत की तरह औरतों को स्वतंत्रता नहीं देते, लेकिन जिस हिसाब से भारत में लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार, जघन्य हत्या और मानव तस्करी की अनवरत घटनाएं हो रही हैं, उससे भारत की वैश्विक स्तर पर एक बहुत खराब छवि बन रही है। हमें आर्थिक, सैन्य व अंतरिक्ष महाबली बनने के साथ-साथ मानवीय, सहिष्णु, संवेदनशील, दयालु तथा धार्मिक व जातीय आधार पर मिल-जुलकर रहने वाले, शांतिपूर्ण समाज बनने का सद्प्रयास भी करना चाहिए, ताकि हम भी विश्व के उन ‘रहने के लिए के लिए सर्वोत्तम देशों’ में अपना कुछ गौरवपूर्ण स्थान बना सकें।

’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

प्रदूषण का जहर

आज चूंकि जल और वायु प्रदूषण का दौर है इसलिए मनुष्य के खाद्य उपभोग की तमाम चीजों को भी इस प्रदूषण ने अपने आगोश में ले लिया है। अनाज, दालों और सब्जियों में आर्सेनिक, यूरिया और पारे की खतरनाक स्तर में मौजूदगी मनुष्य जीवन पर आसन्न गहरे संकट की तरफ इशारा करती है। आवश्यकता से अधिक रसायनों के उपयोग से न केवल फसलें जहरीली हो रही हैं बल्कि भूजल भी खतरनाक रूप से कैंसर और अन्य रोगों का कारण बन कर लोगों को मौत की ओर धकेल रहा है। जहरीले और बेहद गंदे जल से सब्जियों की सिंचाई, उनकी धुलाई और उन्हें ताजा व हरा दिखाने के लिए प्रयुक्त रसायनों से पारा और आर्सेनिक तत्त्व सीधे मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। इससे स्थिति और अधिक भयावह होती जा रही है। इसे रोकने के अनेक उपाय हो सकते हैं, लेकिन सबसे उपयुक्त उपाय उपभोक्ताओं की जागरूकता है। जहां भी गंदे नालों से सिंचाई और सब्जियों की धुलाई होती दिखे, किसानों को समझाया जाए। सरकार अधिक सजग होकर इसे रोके अन्यथा बहुत बड़ी आबादी के बीमार होने पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अधिकतम अंश स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करना पड़ सकता है।

’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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