ताज़ा खबर
 

चौपाल : गोवंश और सियासत

प्रदेश सरकार के लिए अखिलेश-मायावती की रैलियों में घुसे सांडों ने चेतावनी का काम किया। एक सांड मुख्यमंत्री के हेलीपैड पर भी चला आया था। इससे सीख लेकर उत्तर प्रदेश में हुई प्रधानमंत्री की तीन रैलियों से पहले रात भर इलाके में आवारा पशुओं की धरपकड़ की गई।

Author May 9, 2019 1:27 AM
सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन की कन्नौज रैली में सांड (फोटो सोर्स: ANI)

उत्तर प्रदेश की चुनावी रैलियों में बयानों और दावों-वादों के बीच सांड को लेकर भी सियासत होने लगी है। प्रदेश सरकार सांडों को लेकर परेशान हो रही है, तो सपा-बसपा गठबंधन पशुधन को मुद्दा बनाने में जुट गया है। सपा नेता अखिलेश यादव ने समर्थकों की भीड़ को गिराते हुए एक सांड का वीडियो ट्वीट किया। साथ में लिखा- ‘ये सांड पशुओं और किसानों की ओर से ज्ञापन लिए घूम रहा है। बेचारा गलत जगह आ गया। जाना था तिरवा, पहुंच गया छिबरामऊ।’
इससे पहले कन्नौज में सपा-बसपा गठबंधन की रैली के हेलीपैड पर सांड चला आया था। सपा प्रमुख का हेलीकॉप्टर पंद्रह मिनट हवा में अटका रहा। उन्होंने ट्वीट भी किया- ‘पिछले 2 सालों में जनता 5 करोड़ आवारा पशुओं से परेशान हो गई। अगर सरकार राजनीतिक कार्यक्रमों में सांड को घुसने से नहीं रोक पा रही है, तो गरीब किसानों का क्या हाल होगा।’ अगले दिन एक और ट्वीट किया- ‘जब सांड को बताया कि ये उनको बेघर करने वालों की रैली नहीं है, तब जाकर वो शांत हुआ।’ वहीं बसपा प्रमुख सांड का जिक्र अपने भाषणों में कर रही हैं। उरई में उन्होंने राज्य सरकार पर सांड के सहारे उनकी रैलियों को रोकने का आरोप लगाया। जालौन में भी बसपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा हमें प्रचार से रोकने में लगी है। कन्नौज में हेलीपैड पर सांड को छोड़ा गया और हरदोई में भी ऐसा ही किया गया।

प्रदेश सरकार के लिए अखिलेश-मायावती की रैलियों में घुसे सांडों ने चेतावनी का काम किया। एक सांड मुख्यमंत्री के हेलीपैड पर भी चला आया था। इससे सीख लेकर उत्तर प्रदेश में हुई प्रधानमंत्री की तीन रैलियों से पहले रात भर इलाके में आवारा पशुओं की धरपकड़ की गई। सांड और छुट्टा गायों को पकड़ कर गोशालाओं या दूसरी जगहों पर रखा गया। सीतापुर के सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि रैली में कोई चूक न हो इसलिए छुट्टा पशुओं को पकड़ा गया। उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग का दावा है कि राज्य में 11 लाख आवारा गोवंश हैं। आखिरी पशुगणना 2012 में हुई थी। वहीं, गांव वालों का मानना है कि हर ग्राम पंचायत में करीब 100 आवारा जानवर होंगे। राज्य में 59 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं। गोवंश कल्याण के लिए प्रदेश सरकार ने 2019-20 के बजट में 612.6 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था। इसके बावजूद गोवंश का आवारा भटकना सरकार की गोवंश और पशुधन संबंंधी नीति पर सवालिया निशान लगाता है।
’रितेश कुमार उपाध्याय, संत कबीर नगर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X