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चौपाल: सदुपयोग हो पैसे का

केंद्र सरकार को अब व्यापक व समग्र रूप से यह प्रयास करना चाहिए कि पाई-पाई पैसे का सदुपयोग देश व जनहित में हो, ताकि सरकार के इस फैसले की आलोचना करने वालों का मुंह बंद हो सके।

Author नई दिल्ली | Updated: August 29, 2019 4:50 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। (फाइल फोटो सोर्स: PTI)

रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को पौने दो लाख करोड़ रुपए हस्तांतरित करने का फैसला किया है। देश का पैसा, देश को मिले और जनहित में अगर इसका सदुपयोग होता है तो यह निर्णय बहुत ही सराहनीय व स्वागत योग्य है। लेकिन अब तक जो भी देखने और सुनने में आया है कि केंद्र सरकार देश व जनहित में जितनी भी अच्छी योजनाएं बनाती है, पैसा देती है, उस पैसे का उपयोग कम, दुरुपयोग ज्यादा होता है। चाहे वह बैंकों से कर्ज लेकर भाग जाने का मामला हो या इन योजनाओं में भ्रष्टाचार, कमीशन खोरी का मामला हो। केंद्र सरकार को अब व्यापक व समग्र रूप से यह प्रयास करना चाहिए कि पाई-पाई पैसे का सदुपयोग देश व जनहित में हो, ताकि सरकार के इस फैसले की आलोचना करने वालों का मुंह बंद हो सके।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद (उज्जैन)

अनूठी पहल
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए टीबी पीड़ित एक बच्ची के इलाज का पूरा खर्चा उठाने का संकल्प लिया और सबसे अच्छी बात यह रही कि तत्काल बाद राजभवन के कई अधिकारियों ने इसी तरीके की पहल करते हुए टीबी पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए गोद लिया। काश, आज भारत में सभी साधन संपन्न लोग अगर इसी तरीके से पहल करते हुए शिक्षा से वंचित या इलाज से वंचित गरीब बेसहारा बच्चों को गोद लेकर के उनकी परवरिश की जिम्मेदारी उठा लें तो हम एक सशक्त और मजबूत समाज की स्थापना कर सकेंगे।
’रमेश माहेश्वरी, सुल्तानपुर

कामयाबी का शिखर
कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जो कामयाबी के पीछे नहीं बल्कि कामयाबी उनके पीछे भागती है और ऐसे में वे आसमान में इतनी सीढ़ियां लगा लेती हैं कि उनके साथ चलने वाले काफी पीछे छूट जाते हैं। पीवी सिंधू, हिमा दास, दुती चंद से लेकर मैरीकॉम, सानिया मिर्जा और गीता फोगाट तक आसमान में चमकने वाले कुछ सितारे ऐसे ही हैं जो सफलता के उस मुकाम पर हैं जहां पहुंचना मुश्किल तो नहीं पर फिलहाल भारतीय महिला खिलाड़ियों के लिए आसान भी नहीं है। खेलों का हम सभी से नाता रहा है। देश में खेलों को प्रोत्साहन मिलने के साथ इन दिनों बड़ी संख्या में महिलाएं इसमें करियर बना रही हैं। बात चाहे क्रिकेट या हॉकी की हो या तैराकी और फुटबॉल की हर क्षेत्र में प्रतिभाओं की भरमार है। लेकिन प्रतिभा तभी निखरती है जब उसे तराशा जाए। आज महिलाएं आत्मनिर्भर, स्वनिर्मित और आत्मविश्वासी हैं जिन्होंने पुरुष प्रधान चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी योग्यता प्रदर्शित की है। वे केवल शिक्षिका, नर्स, डाक्टर न बन कर इंजीनियगिंर, वैमानिकी, सेना, पत्रकारिता जैसे नए क्षेत्रों को अपना रही हैं। राजनीति के क्षेत्रों में महिलाओं ने नए कीतिर्मान स्थापित किए हैं।

बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध और अब इक्कीसवीं सदी के प्रारंभ में बराबरी व्यवहार वाले जोड़े बन रहे हैं। नौकरी वाली नारी के साथ पुरुष की मानसिकता में भी बदलाव आया है। पहले नौकरी वाली औरत के पति को औरत की कमाई खाने वाला कह कर चिढ़ाया जाता था। लेकिन आज यह सोच बदल चुकी है। स्त्री अब अत्मनिर्भर है। महिलाओं के संबंध मे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि यदि आपको देश का विकास करना है तो महिलाओं का उत्थान करना होगा। महिलाओं का विकास होने पर समाज व देश का विकास स्वत: हो जाएगा।
’अमन सिंह, बरेली

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