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चौपाल: गण बनाम तंत्र व बदहाल उच्च शिक्षा

भारत के गण के तंत्र में आए खोट का आधार है राजनीति का खोट।

आज गण के तंत्र में आमजन को जरा भी अहसास नहीं होता कि यह उनका तंत्र है।

भारतीय संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को स्वीकृत किया था। इसी उपलक्ष्य में 26 नवंबर को भारतीय संविधान दिवस मनाया जाता है। उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को शत-शत नमन जिनकी बदौलत आज हम एक गणतंत्र में आजादी से रह रहे हैं। महात्मा गांधी ने गणतंत्र के लिए विचार रखा था कि ‘मैं ऐसे संविधान के लिए प्रयत्न करूंगा जिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति को भी अहसास हो कि यह देश उसका है, इसके निर्माण में उसका योगदान है, उसकी आवाज का यहां महत्त्व है…।’

अफसोस की बात है कि गांधीजी के इस आदर्श का अनुसरण करना आजाद देश के सत्ताधारी, स्वार्थी राजनेता और नौकरशाह भूल गए, तभी तो आज गण और तंत्र के बीच फासला बढ़ता जा रहा है। आज गण के तंत्र में आमजन को जरा भी अहसास नहीं होता कि यह उनका तंत्र है या उनकी सेवा के लिए संविधान में गण के लिए तंत्र का प्रावधान किया गया था। गण पर तंत्र का हावी होना यह भी दर्शाता है कि देश की राजनीति और नौकरशाही में स्वार्थी लोगों की संख्या बढ़ रही है और देशभक्तों की कमी हो रही है।

भारत के गण के तंत्र में आए खोट का आधार है राजनीति का खोट। इस खोट को दूर करने में गण सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है अपने वोट का प्रयोग राजनीतिक तौर पर जागरूक होकर करके। गणतंत्र की आन-बान और शान के लिए देश के हरेक नागरिक को, चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का क्यों न हो, अपने अंदर देशभक्ति की भावना जगानी चाहिए; संविधान में मिले अधिकारों के लिए ही नहीं, बल्कि कर्तव्यों के निर्वाह में भी गंभीरता दिखानी चाहिए।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

बदहाल उच्च शिक्षा

किसी भी देश की उच्च शिक्षा की तस्वीर वहां की सरकार की शिक्षा क्षेत्र में प्राथमिकता को दर्शाती है। पिछले कई सालों से लगातार जब भी दुनिया में बेहतर गुणवत्ता वाले विश्वविद्यालयों की सूची सामने आती है तो सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि पहले तो भारत शीर्ष 200 में भी जगह बनाने में कामयाब हो जाता था लेकिन हाल ही में जारी टाइम्स हायर एजुकेशन रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष 300 में भारत का एक भी विश्वविद्यालय शामिल नहीं है।

सवाल है कि सरकारों की ओर से लगातार विकास के दावों के बावजूद आखिर इस मामले में तस्वीर क्यों बिगड़ती जा रही है? सुधार के बजाय हालात बदतर क्यों हैं? उच्च शिक्षा के मौजूदा हालात के रहते सरकार अपने ‘स्टडी इन इंडिया’ के सपने को कैसे साकार कर पाएगी? सरकार से गुजारिश है कि इस मामले में सुधार के लिए ठोस पहलकदमी- जैसे शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती, गुणवत्ता सुधार के ठोस उपाय करे ताकि भविष्य के लिए कोई उम्मीद जग सके।

’कपिल एम वड़ियार, पाली, राजस्थान

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