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चौपाल: बच्चों की खातिर व अपना गिरेबां

बच्चे देश का भविष्य होते हैं लिहाजा, हमें अपने बच्चों का कल्याण हर हाल में सुनिश्चित करना चाहिए।

Author Published on: October 4, 2019 3:02 AM
आज तक पाक हुक्मरानों ने इसके लिए क्षमा तक नहीं मांगी, उन हत्यारों-बलात्कारियों को दंडित करना तो दूर की बात है।

वर्ल्ड विजन आफ इंडिया और इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल मैनेजमेंट एंड रिसर्च द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश बच्चों को पोषण और सुरक्षित जीवन देने के मामले में पूरे देश में सबसे पीछे है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, बाल अधिकार और उनके लिए सकारात्मक माहौल जैसे बिंदुओं पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। मध्यप्रदेश के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। बाल मृत्यु दर, कुपोषण और बच्चों के साथ हो रहे अपराधों को, जिनमें यौन शोषण जैसे मामले भी शामिल हैं, प्रदेश सरकार रोक नहीं पा रही है। बच्चे देश का भविष्य होते हैं लिहाजा, हमें अपने बच्चों का कल्याण हर हाल में सुनिश्चित करना चाहिए। सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर संबंधित विभागों को अपनी योजनाएं गंभीरतापूर्वक लागू कर इस स्थिति से उबरने का प्रयास करना चाहिए।

’ललित महालकरी, इंदौर, मध्यप्रदेश

अपना गिरेबां

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा है कि विश्व इस्लामोफोबिया (इस्लाम के प्रति भय/ घृणा) से ग्रस्त है। साथ ही उन्होंने धमकी दी कि कश्मीर के हालात ऐसे हैं कि दुनिया के 130 करोड़ मुसलिम हथियार उठा सकते हैं। इस धमकी के जरिए इमरान खुद इस्लामोफोबिया बढ़ा रहे हैं, क्या इस बात का एहसास उन्हें है? जब आप बात-बात पर विश्व को आतंकित करेंगे, या करने का प्रयास करेंगे, तो आपके खिलाफ भय और घृणा बढ़ने वाले ही हैं।

एक हैरत की बात यह है कि इमरान ने संसार के कुल 160 करोड़ मुसलिमों की जगह केवल 130 करोड़ की बात की। तीस करोड़ उन्होंने क्यों छोड़ दिए? वास्तव में ये 30 करोड़ हैं- शिया, अहमदिया जैसे समूह जो सुन्नी मुसलिमों के बीच अल्पसंख्यक हैं। ये समूह खुद इस्लामोफोबिया (अथवा सुन्नीफोबिया) के शिकार हैं। सुन्नी आतंकी इन पर भी हमले करते रहते हैं। इनके अतिरिक्त बलूच, पख्तून, सिंधी, मुहाजिर, सरायकी जैसे अन्य समुदाय भी हैं, जो सुन्नीफोबिया के मारे हैं।

इमरान के पुरखे जनरल एएके नियाजी ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान जाते हुए यह भयानक धमकी दी थी कि वे जल्दी ही वहां की जनसंख्या पश्चिमी पाकिस्तान से कम कर देंगे। इसलिए 267 दिन तक प्रतिदिन 12,000 हत्याएं, अर्थात कुल 32 लाख बंगालियों का कत्ल एवं 12 लाख बलात्कार कर नियाजी की फौज ने एक पैशाचिक रिकॉर्ड बनाया। ये आंकड़े पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हम्दुर्रह्मान आयोग और संयुक्त राष्ट्र के हैं। आज तक पाक हुक्मरानों ने इसके लिए क्षमा तक नहीं मांगी, उन हत्यारों-बलात्कारियों को दंडित करना तो दूर की बात है। ये ऐसे कृत्य हैं, जिनके कारण इस्लामोफोबिया फैला है।
’पूनम मित्तल, मोहनपुरी, मेरठ

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