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चौपाल: उम्मीदों पर पानी

विशेषज्ञों के मुताबिक पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, पानी की बर्बादी, पहाड़ों से पत्थर और नदियों से रेत के खनन, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग आदि सहित प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड और हरियाणा सहित कई राज्यों में बेमौसम बारिश से किसान हलकान हैं। इस बारिश से गेहूं, जौ, सरसों, चना व मटर सहित रबी सीजन की कमोबेश सभी फसलों को नुकसान पहुंचा है। अक्सर देखा जाता है कि फरवरी के अंत में अमूमन मौसम साफ हो जाता है और ठंड में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की जाती है, जो रबी की फसलों के पकने में सहायक होती है। इससे फसलों की बालियों में अच्छे दाने पड़ते हैं, पैदावार अच्छी होती है। लेकिन इस बारिश ने पकने की कगार पर पहुंची फसलों को खेतों में ही धराशायी कर दिया। लिहाजा, किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
आखिर इस मौसम में बारिश की क्या वजह है! विशेषज्ञों के मुताबिक पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, पानी की बर्बादी, पहाड़ों से पत्थर और नदियों से रेत के खनन, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग आदि सहित प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। मौसमी परिवर्तन के रूप में इसका खमियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान मौसम पर निर्भर किसानों को उठाना पड़ता है। लिहाजा, अब समय आ गया है कि भारत के सभी नागरिक अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं और पर्यावरण को बचाएं।
’अनीता सिंह मौर्य, मानिकपुर, चंदौली

तबादला तंत्र
क्या भारतीय लोकतंत्र में तबादलों की सकारात्मक वजह ढूंढ़ी जा सकती है? हम देखते हैं कि जब भी किसी प्रदेश में नई सरकार का गठन होता है तो प्रशासनिक तंत्र में तबादलों का दौर शुरू हो जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले से दो अर्थ निकलते हैं या तो लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारी कार्य नहीं कर पाते हैं या फिर हर नेता या पार्टी अपने समर्थक अधिकारियों को वांछित पदों पर बैठना चाहती है। ऐसे में जनता की सेवा के वचन की ओर कौन ध्यान देगा? क्या कोई प्रशासनिक अधिकारी जनता की पसंद का नहीं होना चाहिए? क्या राजनीति ही अधिकारियों का चुनाव करती रहेगी? जब तक हम जाग्रत नहीं होंगे तब तक सत्तातंत्र पारदर्शी नहीं होगा। प्रत्येक सरकारी कार्य या योजना की गुणवत्ता व अनुपालन पर निगरानी की जिम्मेदारी जनता को लेनी होगी।
’मंगलेश सोनी, मनावर, धार, मध्यप्रदेश

पेंशन का पुनर्निर्धारण
हाल ही में हजारों सेवानिवृत्त बैंक कर्मियों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर सरकार से मांग की है कि जिस तरह सरकारी कर्मचारियों की पेंशन समय-समय पर पुनर्निर्धारित होती है उसी तरह भारतीय बैंक संघ भी बैंक पेंशनधारकों की पेंशन समय-समय पर पुनर्निर्धारित कर उन्हें लाभ पहुंचाए। द्विपक्षीय समझौते के अनुसार जब बैंक कर्मियों के वेतन पुनर्निर्धारित होते रहते हैं तो बैंक पेंशनधारकों की पेंशन पुनर्निर्धारित क्यों नहीं हो सकती? अगर पेंशन पुनर्निर्धारित होने लगे और महंगाई भत्ता मूल वेतन में मिला कर मूल वेतन बढ़ाया जाए तो पेंशनधारकों को भी बढ़ोतरी का फायदा मिल सकता है। सेवानिवृत्त कर्मियों के संगठन ने यह भी कहा है कि ‘परिवार पेंशन’ कुछ बैंकों में तो बहुत कम (नाममात्र की) मिलती है जबकि सरकारी कर्मियों को परिवार पेंशन करीब पचास प्रतिशत तक देने का प्रावधान है। ऐसा ही प्रावधान बैंक कर्मियों की परिवार पेंशन में भी किया जाना चाहिए।
’महेश नेनावा, गिरधर नगर, इंदौर

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