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चौपाल: किसानों की खातिर

आजकल किसानों को बीज, यूरिया, कीटनाशक या जैविक खाद आदि खरीदने में इस वित्तीय मदद से भी अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में इस वित्तीय मदद से किसानों का कितना भला होगा?

Author Published on: March 16, 2019 3:45 AM
किसान के लिए प्रतिमाह 500 रुपए उनकी जरूरतों के लिए काफी हैं? (Photo: REUTERS)

कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है लेकिन बीते कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कृषि उत्पादों की गिरती कीमत और 2017-18 से खाद्येतर क्षेत्रों के सापेक्ष भारत में खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट के चलते देश की कृषि आमदनी कम हुई है। बीती एक फरवरी को केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट में कई अहम घोषणाएं की गर्इं। इनमें किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक महत्त्वपूर्ण घोषणा थी जिसके अंतर्गत दो हेक्टेयर तक जोत वाले छोटे और सीमांत किसानों को प्रति वर्ष 6000 रुपए की सहायता दी जाएगी। यह रकम 2000 रुपए की तीन किस्तों में लाभार्थी के खाते में सीधे डाली जाएगी। इस योजना में प्रति वर्ष 75000 करोड़ रुपए खर्च होने का अमुमान है जो केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

किसानों के लिए वित्तीय मदद बेशक एक अच्छी पहल है, लेकिन क्या 6000 रुपए वार्षिक यानी प्रतिमाह 500 रुपए उनकी जरूरतों के लिए काफी हैं? आजकल किसानों को बीज, यूरिया, कीटनाशक या जैविक खाद आदि खरीदने में इस वित्तीय मदद से भी अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में इस वित्तीय मदद से किसानों का कितना भला होगा? सरकार के अनुसार इस योजना से लगभग बारह करोड़ किसानों के लाभान्वित होने की उम्मीद है। इसका लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनका नाम प्रधानमंत्री किसान योजना की सूची में आया होगा, यानी जो किसान भूमिहीन होंगे उन्हें इस योजना का कोई लाभ नहीं होने वाला।

ऐसे में दूसरे के खेतों में काम करके अपनी जीविका चलाने वाले किसान या फिर अपने खेतों को साहूकारों के पास गिरवी रखने वाले किसान, जिनका कर्ज चुकाने तक उस खेत पर अपना कोई अधिकार नहीं होता, उन्हें भी क्या इस योजना का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए? इस सबके मद्देनजर जरूरी है कि सरकार कोई ठोस रणनीति बनाकर देश की कृषि की समस्या का स्थायी समाधान करे ताकि किसानों को वित्तीय सहायता या सरकार के कर्जमाफी जैसे चुनावी जुमलों पर निर्भर न रहना पड़े।
शुभम शर्मा, एमसीयू, नोएडा

आतंक की ढाल

चीन ने अपनी चिरपरिचित पैंतरेबाजी से कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से फिर बचा लिया। दस सालों में चौथी बार चीन ने मसूद अजहर को बचा कर साफ कर दिया कि उसे अपने तात्कालिक हित साधने के लिए आतंक की ढाल बनने से भी परहेज नहीं है। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के एकमत होने पर भी चीन का मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में अड़ंगा लगाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद वैश्विक मंच पर मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने की पुरजोर मांग उठी थी। इस मामले में कई अन्य देशों ने भारत का समर्थन भी किया, लेकिन चीन की आतंक समर्थक नीति से भारत की आतंक विरोधी मुहिम को धक्का लगा है।
’पवन कुमार मौर्य, नई दिल्ली

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