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चौपाल: महंगा चुनाव

इस बार चुनाव में सबसे ज्यादा पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों और नकदी की बरामदगी का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। इससे लगता है कि मौजूदा चुनाव अब तक के सभी चुनावों से अधिक महंगा साबित होगा।

Author Published on: April 30, 2019 2:10 AM
चुनावी मौसम शुरू होते ही आसमान नेताओं के हेलिकॉप्टरों व छोटे विमानों से पट रहा है। अब हर पार्टी चुनावी मौसम में हेलिकॉप्टर या छोटे विमानों पर ज्यादा से ज्यादा आश्रित होने लगी हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान पूरा होने तक चुनाव आयोग ने देश भर में 742 करोड़ की नकदी और 1180 करोड़ रुपए से अधिक के मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए हैं। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग की तरफ से जितने मूल्य की सामग्री और नकदी जब्त की गई थी, यह आंकड़ा उससे कहीं अधिक है। इस बार चुनाव में सबसे ज्यादा पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों और नकदी की बरामदगी का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। इससे लगता है कि मौजूदा चुनाव अब तक के सभी चुनावों से अधिक महंगा साबित होगा।
’संजू कुमार, उत्तरादाबास, हनुमानगढ़, राजस्थान

फर्जी ही फर्जी
इन दिनों देश का चप्पा-चप्पा फर्जीवाड़े की गिरफ्त में है। फर्जी आयकर विभाग, फर्जी पुलिस, फर्जी टीसी, फर्जी वीडियो, फर्जी संदेश, फर्जी बैंक एसएमएस, फर्जी ऐप्स, न जाने क्या-क्या सब फर्जी! इस फर्जीवाड़े का शिकार हो रहे हैं आमजन। आमजन को इस फर्जीवाड़े से बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है लेकिन लगता है कि सरकार डाल-डाल है तो ये फर्जीवाड़ा (ठगी) करने वाले पात-पात हैं! आखिर कोई तो इनसे पिंड छुड़ाए? क्या बेबस जनता ऐसे ही इनका शिकार होती रहेगी? बढ़ता फर्जीवाड़ा व ठगी इस बात का प्रमाण है कि ये शातिर लोग इतने दुस्साहसी हो गए हैं कि उनमें देश के कानून (व्यवस्था) और पुलिस का कोई खौफ नहीं है!
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

गिरती रैंकिंग
हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में पूरब का आॅक्सफोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में भी अपना स्थान नहीं बना पाया है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। इसके अनेक कारण हैं। सर्वप्रथम तो विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी और उचित शिक्षक-छात्र अनुपात न होना विश्वविद्यालय के शैक्षिक स्तर को प्रभावित करता है। अन्य कारणों में शोध का निम्न स्तर, विश्वविद्यालय परिसर में आए दिन पैदा रही अराजकता से बिगड़ा माहौल, शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी आदि तमाम मुद्दे हैं जिनका असर यहां के शैक्षिक परिवेश पर पड़ता है। इस तरह के विवादों और बवाल की वजह से जनता में इस विश्वविद्यालय के प्रति सम्मान घटा है जिसकी जानकारी एनआईआरएफ द्वारा जारी हर वर्ष इसकी गिरती रैंकिंग से साफ है। 2016 में इसकी रैंकिंग 68 थी, 2017 में 27 स्थान गिर कर 95 हुई और 2018 में यह देश के 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची में अपना स्थान नहीं बना सका। 2019 में सबसे खराब स्थिति के साथ देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची से इसका बाहर होना सभी के लिए अत्यंत निराशाजनक है। इस विश्वविद्यालय की रैंकिंग सुधारने के लिए केवल विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रतिबद्ध होना जरूरी नहीं है बल्कि प्रतिबद्धता यहां पढ़ रहे प्रत्येक छात्र में भी होनी चाहिए तभी यह अपना गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकेगा।
’ऋषभ गुप्ता, मम्फोर्डगंज, प्रयागराज

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