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चौपाल: पर्यावरण का रुख व अच्छा भी, बुरा भी

पेरिस सम्मलेन के बाद यह अघोषित रूप से सहमति बनी कि सभी देश अपने स्तर पर इस पर काम करेंगे।

Author Published on: December 13, 2019 4:01 AM
1995 में बर्लिन में हुए पहले सम्मलेन में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, उत्सर्जन रहित तकनीक के लिए, अमीर देश गरीब देशों को आर्थिक मदद देने पर चर्चा हुई थी।

स्पेन की राजधानी मेड्रिड में पर्यावरण मंत्री ने ‘कॉप 25’ सम्मलेन में जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुरूप काम करने की जानकारी दी। ऐसा लगता है संयुक्त राष्ट्र के मातहत पिछले पच्चीस सालों से सिर्फ समय बर्बाद किया जा रहा है। चालीस फीसद कार्बन उत्सर्जन के लिए जो दो देश जिम्मेदार हैं, उसमें से अमेरिका तो इस संकल्पना को ही नकार चुका है। चीन ने किसी भी अंतिम तारीख को मानने से मना कर दिया है। 1995 में बर्लिन में हुए पहले सम्मलेन में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, उत्सर्जन रहित तकनीक के लिए, अमीर देश गरीब देशों को आर्थिक मदद देने पर चर्चा हुई थी।

इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। पेरिस सम्मलेन के बाद यह अघोषित रूप से सहमति बनी कि सभी देश अपने स्तर पर इस पर काम करेंगे। 2030 तक उत्सर्जन को आधा करने और तापमान को दो डिग्री से ज्यादा नहीं बढ़ने देने के लिए अब दुनिया का पास सिर्फ ग्यारह साल बच रहे हैं। ऐसा नहीं लगता कि कुछ ठोस हो पाएगा। गरीब देशों पर मौसम में बदलाव का सबसे ज्यादा असर होता है। पिछले साल केरल के बाढ़ ने वहां के जीडीपी के एक वर्ष की आमदनी को स्वाहा कर दिया था।

’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

अच्छा भी, बुरा भी

आज के समय में तो सोशल मीडिया के मंचों पर बहुत भीड़ लगी हुई है। हर एक व्यक्ति के दिल और दिमाग पर भी यह राज कर रहा हैं और इस पर लोग और यहां तक कि बच्चे भी खूब व्यस्त रहते हैं। यह ध्यान रखना चाहिए कि सोशल मीडिया जितना फायदेमंद है, उतना ही नुकसानदेह भी है। यों इसका पहला प्रभाव सकारात्मक है, दूसरा नकारात्मक। बहुत सारी सूचनाएं आज हमें सोशल मीडिया से ही मिल पाती है। नए लोगों से जान-पहचान बनती है, हमारी दुनिया बड़ी होती है। लेकिन यह भी सही है कि इसकी वजह से अपराधों का दायरा भी बढ़ा है। आज जिस तरह बच्चे इसमें अपनी दुनिया को गुम कर ले रहे हैं, वह आने वाले वक्त के लिए एक चेतावनी की तरह है। इसलिए अगर सीमा में इसका उपयोग किया जाए तभी इसका फायदा समाज को मिल सकता है। वरना समाज का चेहरा विकृत भी हो जा सकता है।

’मो जमील, मधुबनी, बिहार

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