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चौपाल: रोजगार की खातिर

दिन-प्रतिदिन बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है क्योंकि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को कौशलभिमुख शिक्षा देने में अबतक विफल रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार को शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करके कौशल से संबधित शिक्षा को पर्याप्त जगह देनी चाहिए।

Author Published on: April 23, 2019 2:26 AM
भारत में कम पढ़े-लिखे लोगों के मुकाबले ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों के सामने रोजगार का संकट. ( फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के मुताबिक 2017-2018 में देश के ग्यारह राज्यों में बेरोजगारी की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक थी। इससे साफ है कि मांग के मुताबिक रोजगार का सृजन करने में हमारा देश विफल रहा है। हमारे यहां कृषि, सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर होते हैं। कृषि क्षेत्र में अल्प शिक्षित और अशिक्षित लोगों को मनरेगा के तहत कुछ महीनों के लिए ही रोजगार मिल पाता है लेकिन उसमें भी परिश्रम के हिसाब से आय बहुत कम होती है। छुपी बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में चरम पर है। विनिर्माण क्षेत्र उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रहा हैं।

मेक इन इंडिया जैसी कार्यक्रम हाशिये पर नजर पर आ रहे हैं। सेवा क्षेत्र प्रगति पर है लेकिन इसमें रोजगार के अवसर केवल प्रशिक्षित और उच्च शिक्षित लोगों को मिलते हैं। सरकारी नौकरियां महाराष्ट्र में अनुबंध के आधार पर निकाली जा रही हैं और केंद्र की नौकरियां उम्मीद के मुताबिक अब तक नहीं निकली हैं। राष्ट्रीय बैंकों में हर साल नौकरियां निकल रही हैं लेकिन घटते प्रतिशत में। देश के इंजीनियर अपने क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार के अवसर न होने के कारण बैंक या किसी अन्य क्षेत्र में कार्य करने के लिए मजबूर हो गए हैं।

दिन-प्रतिदिन बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है क्योंकि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को कौशलभिमुख शिक्षा देने में अबतक विफल रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार को शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करके कौशल से संबधित शिक्षा को पर्याप्त जगह देनी चाहिए। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक सटीक नीति बनाई जानी चाहिए और साथ ही मध्यम और लघु उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि अकुशल युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिल सकें। कर्ज की प्रक्रिया सुलभ की जानी चाहिए ताकि तकनीक के बल पर सस्ती कीमत पर उत्पादन हो जो विदेशी उत्पादों को भी टक्कर दे पाए।

कृषि में कर्ज माफी की राजनीति से परे सोच कर सरकार को तकनीकी निवेश के सहारे कृषि को बढ़ावा देना चाहिए ताकि किसान आत्मनिर्भर बन कर खेती कर पाएं। युवाओं को स्वरोजगार और उद्योग खोलने के लिए प्रेरित करने की खातिर ग्रामीण क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र और कार्यशालाओं का प्रबंध करना चाहिए ताकि ग्रामीण युवाओं को कृषि के अलावा अन्य उद्योगों के बारे में जानकारी मिल सके। इस तरह के कदम उठा कर बेरोजगारी के समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली, महाराष्ट्र

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