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चौपाल: दलबदल का खेल

जनता को चाहिए कि वे इस चुनावी जाल में न फंस कर सोच-समझ कर मतदान करे और उसी उम्मीदवार को वोट दे जो समाज की परेशानियों से भली-भांति वाकिफ हो और जो समाज के विकास में ईमानदारी से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाए।

Author Published on: March 20, 2019 3:51 AM
चुनाव के साथ ही पार्टियां तैयारियों में जुट गई हैं।(प्रतीकात्मक फोटो स्रोतः एक्सप्रेस आर्काइव)

जैसे ही लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान हुआ, राजनीतिक पार्टियों के बीच चुनावी घमासान और तेज हो गया। नेताओं द्वारा हर बार की तरह इस बार भी दलबदल का खेल शुरू हो गया है। हैरान करने वाली बात कि अभी कुछ दिन हुए ही हैं और दलबदल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि पार्टियां और नेता बस अपने स्वार्थ के लिए बातें करते हैं, चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। ज्यादातर नेता अपनी पसंदीदा जगहों की सीट के लिए पार्टी द्वारा टिकट न मिलने का राग अलाप रहे हैं। परंतु कारण चाहे जो हो, कल तक जो किसी पार्टी की कमियां बताने में और उनकी बुराई करने में लगे हुए थे, आज उसी पार्टी का दामन थाम रहे हैं और इसके द्वारा जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। इसलिए जनता को चाहिए कि वे इस चुनावी जाल में न फंस कर सोच-समझ कर मतदान करे और उसी उम्मीदवार को वोट दे जो समाज की परेशानियों से भली-भांति वाकिफ हो और जो समाज के विकास में ईमानदारी से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाए।
’शुभम गुप्ता, धनबाद

मीडिया की जिम्मेदारी
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे मीडिया की जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही हैं। आज के तकनीकी युग में मीडिया लोगों के मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। ऐसे में मीडिया को निष्पक्ष व्यवहार बनाए रखना चाहिए। सभी राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियों का निष्पक्ष प्रकाशन करना चाहिए। यदि ऐसे समय में मीडिया अपने आप को किसी विशेष राजनीतिक दल के साथ जोड़ लेता है और एकमात्र दल का चुनाव प्रचारक बन जाता है तो यह किसी भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदायकहै। जहां आम जनता मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किसी राजनीतिक दल को अच्छा या बुरा निर्धारित करती है और अपना भविष्य तय करती है, अगर ऐसे में मीडिया अपनी निष्पक्षता खो देता है तो यह लोकतंत्र पर एक तरह का कुठाराघात है। ऐसे में लोकतंत्र सिर्फ सिद्धांत बन कर रह जाता है, व्यवहारिक स्थिति कुछ और ही होती है। इस स्थिति में देश के लोगों को अधिक जागरूक होने की जरूरत है। क्योंकि लोकतंत्र को बचाना और मजबूती प्रदान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
’चंद्रशेखर, बीएचयू, वाराणसी

कांग्रेस का दम
कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है और इसका नेतृत्व अब मुख्यत: युवा नेताओं के हाथों में है। इसलिए ही वह छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सत्ता में भी आ चुकी है। अब आगामी लोकसभा चुनाव में भी उसे किसी गठबंधन के दबाव या डर में न आकर सिर्फ अपने ही दम पर आगे बढ़ना चाहिए। कहावत भी है कि जो डर गया वह मर गया। पिछले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन का नतीजा भी वह देख भी चुकी है। इसलिए प्रबुद्ध जनता, कार्यकर्ता और पार्टी नेता चाह रहे हैं कि कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़े, तभी उसे खोया हुआ जनाधार वापस मिल पाएगा।
’वेद मामूरपुर, नरेला

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