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चौपाल: कानून पर विवाद

इस मोटर वाहन कानून में कुल तिरानवे प्रावधान हैं, जिनमें तिरसठ केंद्र सरकार की अधिसूचना द्वारा ही राज्यों पर लागू हो जाते हैं। बाकी के प्रावधान तभी लागू हो सकेंगे जब राज्य सरकारें उसके लिए अधिसूचना जारी करेंगी, जो विवादित विषय कठोर जुर्माने का है।

Author Updated: September 9, 2019 6:02 AM
New Traffic Rules एक सितंबर से देशर में लागू हो चुका है। (Photo: Indian Express)

नया मोटर वाहन कानून इन दिनों केंद्र और राज्यों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। इस नए कानून में लाइसेंस प्रणाली में सुधार, दुर्घटना में घायलों की मदद करने वालों को सुरक्षा और विशेषकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी भरकम जुर्माने आदि कई महत्त्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। सबसे ज्यादा विवाद भारी भरकम जुर्माने को लेकर उठा है। इससे असहमत होकर कुछ राज्यों में इस कानून को अपने यहां लागू करने से मना कर दिया है। इसमें मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। इनके अतिरिक्त कुछ भाजपा शासित राज्य भी हैं जो इस कानून पर अपनी असहमति व्यक्त कर चुके हैं।

इस मोटर वाहन कानून में कुल तिरानवे प्रावधान हैं, जिनमें तिरसठ केंद्र सरकार की अधिसूचना द्वारा ही राज्यों पर लागू हो जाते हैं। बाकी के प्रावधान तभी लागू हो सकेंगे जब राज्य सरकारें उसके लिए अधिसूचना जारी करेंगी, जो विवादित विषय कठोर जुर्माने का है। राज्य सरकारों ने इसे लागू नहीं करने के लिए अपने तर्क दिए हैं। इसमें भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुख है। यह भी सार्वभौमिक सत्य है कि जुर्माना राशि बढ़ने से जरूरी नहीं है कि सभी इसको स्वीकार करने लगें। यदि जुर्माने की राशि बढ़ाई जाती है तो सड़कों की गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए। हाईवे पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता उच्च होनी चाहिए। इसके साथ सभी राज्य एक जैसे नहीं हैं। कुछ राज्य अभी भी काफी पिछड़े हैं। ऐसे में भारी-भरकम जुर्माना सभी राज्यों में तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता। यह भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि जुर्माना वसूलना नियमित आय का साधन नहीं है। यदि इस विषय पर राज्य और केंद्रों के बीच मतभेद हैं तो केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए और बातचीत के माध्यम से राज्य सरकार की चिंताओं को दूर किया जाना चाहिए।
’कुलिंदर सिंह यादव, दिल्ली

वैध बनाम अवैध
हाल में असम सरकार ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की आखिरी सूची जारी कर दी है, जिसमें से उन्नीस लाख लोग बाहर कर दिए गए हैं। हम सभी भलीभांति जानते हैं कि असम की सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है और बांग्लादेशी अपने देश की दयनीय स्थिति से तंग आकर भारत में घुसपैठ करते हैं और ये घुसपैठिए जुगाड़ लगा कर न जाने कितने सालों से भारत के विभिन्न हिस्सों में निवास कर रहें है और राज्यों व केंद्र सरकार की योजनाओं का फायदा भी उठा रहे हैं।

जो लोग वाकई में देश के वैध नागरिक हैं, वे सरकारी योजनाओं और नौकरी पेशे से खुद को वंचित महसूस कर रहें हैं। कुल मिला कर ये घुसपैठिए देश के वैध नागरिकों के वजूद के लिए खतरा हैं क्योंकि ये अवैध तरीके से सीमा पार कर देश में आते हैं और जाली कागजात बनवा कर अपने को वैध नागरिक बनाने की कोशिश में रहते हैं। इसी मसले पर पिछले साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा था कि क्या यह देश कोई धर्मशाला है जहां विदेशी घुसपैठ करते रहेंगे। अगर देश को खतरे से बचाना है तो घुसपैठियों पर कार्रवाई जरूरी है।
’विजय महाजन प्रेमी, वृंदावन (मथुरा)

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